मुंद्रा पोर्ट से बरामद 3000 किलोग्राम हेरोइन से जुड़े मामले में ईडी का एक्शन, दिल्ली-एनसीआर में 5 जगह छापामारी
ईडी ने मुंद्रा बंदरगाह से 21 हजार करोड़ रुपये की हेरोइन तस्करी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत दिल्ली-एनसीआर में पांच स्थानों पर छापेमारी की है।

हेरोइन से जुड़े मामले में ईडी का एक्शन। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)
HighLights
ईडी ने मुंद्रा हेरोइन मामले में दिल्ली-एनसीआर में छापे मारे।
21 हजार करोड़ की हेरोइन तस्करी मामले में कार्रवाई।
नाइट क्लब मालिक हरप्रीत सिंह तलवार को फिर से गिरफ्तार किया।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मुंद्रा बंदरगाह से 21 हजार करोड़ रुपये की लगभग 3000 किलोग्राम हेरोइन तस्करी करने वालों पर मनी लॉन्ड्रिंग का शिकंजा कस गया है। इस सिलसिले में ईडी ने दिल्ली समेत एनसीआर में पांच स्थानों पर छापा मारा।
ईडी के अनुसार, ड्रग्स तस्करी से हुई काली कमाई का बड़ा हिस्सा नाइट क्लबों में खपाया गया था, जिसका पता लगाने के लिए छापेमारी की गई है। इस मामले में मूल केस की जांच कर रही एनआईए ने दिल्ली के नाइट क्लब के मालिक व कारोबारी हरप्रीत सिंह तलवार उर्फ कबीर तलवार समेत चार दर्जन से अधिक आरोपितों को गिरफ्तार किया था।
पिछले दिनों हरप्रीत सिंह तलवार को गुजरात हाई कोर्ट से जमानत मिल गई थी और वह जेल से बाहर आ गया था। ईडी ने उसे फिर से मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार कर लिया है।
ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बड़े ड्रग्स कार्टेल को ध्वस्त करने के लिए चल रहे देशव्यापी अभियान में इससे हुई काली कमाई से बनाई गई संपत्तियों को जब्त करना भी अहम है। इसी के तहत ईडी ने भारत की सबसे बड़ी ड्रग्स बरामदगी के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कार्रवाई तेज की है।
आने वाले दिनों में ड्रग्स तस्करी के अन्य मामलों में भी मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कार्रवाई शुरू होगी। अधिकारी ने कहा कि जिन पांच स्थानों पर छापा मारा जा रहा है, उनमें हरप्रीत सिंह तलवार के साथ-साथ शमशुद्दीन नाम के व्यक्ति के ठिकाने भी शामिल हैं।
यह है मामला
यह पूरा मामला भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी ड्रग्स बरामदगी से जुड़ा हुआ है। यह दुनिया की बड़ी ड्रग्स जब्तियों में भी शुमार है। 13 सितंबर, 2021 को गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर जांच एजेंसियों ने करीब 3000 किलोग्राम हेरोइन जब्त की थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लगभग 21 हजार करोड़ रुपये आंकी गई थी।
ड्रग्स की यह खेप ईरान के रास्ते भारतीय तट पर पहुंची थी। अफगानिस्तान से लाई जा रही इस हेरोइन के पीछे पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई संरक्षित पाकिस्तानी और अफगानिस्तानी तस्करों का हाथ था।
तस्करी से होने वाली आमदनी का इस्तेमाल भारत विरोधी आतंकी समूहों की फंडिंग के लिए किया जाता था। एनआईए ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि इस ड्रग्स नेटवर्क की बिक्री से हुई आय का इस्तेमाल लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों के लिए किया गया था।
