विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

18 घंटे तक बंद रहा पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे का कनेक्टिंग लिंक, 6695 करोड़ रुपये का मिसिंग लिंक नहीं झेल पाया एक मानसून

By Shubham KumarEdited By: Shubham Kumar
Published: Mon, 06 Jul 2026 06:46 PM (IST)Updated: Tue, 07 Jul 2026 06:01 PM (IST)

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का 6695 करोड़ रुपये का 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट उद्घाटन के दो महीने बाद ही भारी बारिश और भूस्खलन के कारण बंद हो गया।

HighLights

  1. मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे भूस्खलन और भारी बारिश के कारण बंद हुआ।

  2. ₹6695 करोड़ का प्रोजेक्ट उद्घाटन के दो महीने बाद ही विफल।

  3. रेल यातायात भी प्रभावित, कई ट्रेनें रद्द, मार्ग बदले गए।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। मुंबई में बीते दिनों तपती गर्मी से बेहाल लोग सिर्फ एक ही दुआ कर रहे थे कि जैसे भी हो, जल्द से जल्द मानसून दस्तक दे ताकि इस झुलसाती तपिश से राहत मिले।

कुदरत ने दुआ सुनी तो सही, लेकिन जब आर्थिक राजधानी में देरी से पहुंचे मानसून ने रफ्तार पकड़ी, तो राहत पल भर में आफत में बदल गई। हाल ये है कि आज पूरा महाराष्ट्र जलमग्न है और इसी आसमानी आफत ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे को लेकर भी कई सारे सवाल खड़े कर दिए।

इस बात को ऐसे समझिए कि करोड़ों की लागत, चमचमाती सड़कें और देश के सबसे आधुनिक रास्तों में शुमार होने का दम भरने वाले मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पहली मानसून भी नहीं झेल पाया और लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन ने इस एक्सप्रेसवे लिंक के चमचमाते दावों की पोल खोलकर रख दी।

भूस्खलन के बाद पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे का कनेक्टिंग लिंक 18 घंटे तक बंद रहा। सोमवार को पुणे और मुंबई के बीच इस मिसिंग लिंक को रात 10 बजे खोला गया।

बंद करना पड़ मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे

सोमवार तड़के करीब 3:30 बजे 'मिसिंग लिंक' टनल के पास हुए भारी भूस्खलन और लगातार आसमान से बरसते बारिश के चलते प्रशासन को मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और पुराना हाईवे, दोनों ही तरफ से पूरी तरह बंद करना पड़ा।

अब इसको लेकर सवाल इसलिए खड़े होने लगे कि जो प्रोजेक्ट कल तक विकास की मिसाल था, वह आज एक ही झटके में राहगीरों के लिए मुसीबत कैसे बन गया?

सीएम फडणवीस ने 1 मई को किया था उद्घाटन

हैरानी की बात यह है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महज नौ हफ्ते पहले, 1 मई 2026 को ही इस फ्लैगशिप स्ट्रेच का उद्घाटन किया था। उद्घाटन के दो महीने के भीतर ही इस 6695 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर पहले गड्ढे उभरे और अब इस भूस्खलन ने सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) के मुताबिक, खालापूर टोल प्लाजा के पास मलबे को साफ करने में 3 से 5 घंटे का समय लगा। भारी मशक्कत और पानी का स्तर कम होने के बाद दोपहर तक रास्ता खोला जा सका, लेकिन गाड़ियों की रफ्तार बेहद धीमी रही।

रेल यातायात पर भी भारी आफत

बता दें कि सड़क के साथ-साथ रेल यातायात पर भी आफत आई। कर्जत-लोनावला खंड में ठाकुरवाड़ी और मंकी हिल के बीच हुए भूस्खलन के कारण सेंट्रल रेलवे को डेक्कन क्वीन, डेक्कन एक्सप्रेस, प्रगति एक्सप्रेस, सिंहगढ़ एक्सप्रेस और इंद्रायणी एक्सप्रेस समेत एक दर्जन से अधिक ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं। कई लंबी दूरी की ट्रेनों के रूट बदलने पड़े।

ऐसे में मुंबई में मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। शहर में 24 घंटे के भीतर औसतन 105.24 मिमी बारिश दर्ज की गई और 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान जताया गया है।

अब समझिए क्यों उठ रहे हैं सवाल?

इस बात को ऐसे समझिए कि यह इस कॉरिडोर के शुरू होने के दो महीने के भीतर दूसरी बड़ी नाकामी है। 6695 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट भारत की सबसे चौड़ी सुरंगों और सबसे ऊंचे केबल-स्टे ब्रिज पिलर के लिए सुर्खियों में था। इसे इसलिए बनाया गया था ताकि दुर्घटना संभावित खंडाला घाट से बचा जा सके और रोजाना 1.5 लाख यात्रियों के 20-30 मिनट बच सकें।

इस एक्सप्रेसवे पर पहले दिखे गड्ढे

आपको ध्यान होगा कि जुलाई की शुरुआत में ही इस नवनिर्मित हाईवे पर गड्ढे दिखाई देने लगे थे, जिसके बाद ठेकेदार को हर दो घंटे में सड़क की जांच करने के आदेश दिए गए थे। उस समय महाराष्ट्र सरकार ने कहा था कि सिर्फ दो गड्ढे हैं जिन्हें ठीक कर दिया जाएगा, जबकि MSRDC ने इसका दोष कोलतार की परत और कंक्रीट बेस के बीच खराब बॉन्डिंग तथा तेल-ईंधन के रिसाव पर मढ़ दिया था।

ऐसे में अब हुए भूस्खलन ने साफ कर दिया है कि देश का यह सबसे महंगा और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट मानसून की पहली मार भी ठीक से झेलने के लिए तैयार नहीं था। सवाल अब यह खड़ा हो रहा है कि क्या इतने बड़े प्रोजेक्ट में सुरक्षा और इंजीनियरिंग के मानकों की अनदेखी की गई?

यह भी पढ़ें- मुंबई में मूसलाधार बारिश, नासिक में मंगलवार को बादल फटने की आशंका; हाई अलर्ट पर प्रशासन