नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा से सांसद और मौजूदा समय में जहाजरानी मंत्रालय देख रहे मुकुल राय ने मंगलवार को सुबह दस बजे रेल मंत्री के पद की शपथ ली। राष्ट्रपति ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उनके कमान संभालने से पूर्व यूपी में दो रेल दुर्घटनाओं में करीब 16 लोगों की मौत हो गई और आठ लोग घायल हो गए हैं। रेल मंत्री ने हादसे में मारे गए लोगों के प्रति शोक जताते हुए मुआवजे की घोषणा भी की है।

शपथ लेने के बाद रेल मंत्री मुकुल राय ने रेल बजट पर हो रही चर्चा में बतौर रेल मंत्री हिस्सा लिया है। पद ग्रहण करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि रेल और उसके यात्रियों की सुरक्षा, साफ-सफाई, समयबद्धता उनकी प्राथमिकता होगी। रेल बजट पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि रेल बजट अब संसद की संपत्ति है, लिहाजा इसके ऊपर कोई भी जवाब संसद के अंदर ही दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि अब वह रेल बजट पर चर्चा के दौरान सभी सवालों के जवाब देंगे।

प्रधानमंत्री ने राज्यसभा से राय का परिचय कराया जबकि लोकसभा में विपक्षी भाजपा सदस्यों ने सदन में रेल बजट पर चर्चा शुरू होते समय राय की अनुपस्थिति पर आपत्ति जताई। राय ने लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार से कहा कि राज्यसभा में परिचय पूरा होते ही वह तुरंत इस सदन में आ गए।

मुकुल इससे पहले भी रेल राज्यमंत्री रह चुके हैं। इस शपथ ग्रहण समारोह में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी शामिल नहीं हुई। सूत्रों के मुताबिक शपथ ग्रहण समारोह के बाद राष्ट्रपति भवन में हुए जलपान में प्रधानमंत्री ने शिरकत नहीं की।

प्रधानमंत्री ने ममता बनर्जी को मनाने के तहत ही तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद मुकुल राय को रेल मंत्री के बनाने का फैसला लिया है। इससे पहले मुकुल राय सरकार में जहाजरानी मंत्री थे। मुकुल पहले भी रेल राज्य मंत्री रह चुके हैं।

मुकुल राय तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाते हैं। गौरतलब है कि मुकुल राय को रेल मंत्री बनाने को मनमोहन सिंह पहले एक बार न कर चुके थे।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष असम के नलबारी में हुए एक रेल हादसे के दौरान जब प्रधानमंत्री ने मुकुल राय को मौके पर जाने को कहा था तो मुकुल राय ने यह कहते हुए मना कर दिया था कि यह विभाग खुद प्रधानमंत्री के पास है। लिहाजा मौके पर जाने की भी जिम्मेदारी उनकी नहीं है। यह उन्होंने तब कहा जब वह रेल राज्य मंत्री थे। इसके चलते ही प्रधानमंत्री ने उन्हें रेल मंत्री का पद न देने की बात कही थी। लेकिन अब बदले राजनीतिक हालातों में एक बार फिर वही मुकुल राय रेल मंत्री का पद संभाल लेंगे।

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी के तेवरों का असर दिखना शुरू हो गया है। दिनेश त्रिवेदी के जाने के साथ उनके रेल बजट के किराया बढ़ाने के प्रस्तावों पर भी कैंची चलनी तय है। इस दौरान पूरी संभावना है कि वह साधारण क्लास की किराया वृद्धि को पूरी तरह वापस लेने एवं स्लीपर क्लास के किराए में आंशिक कमी का एलान कर सकते हैं।

वातानुकूलित श्रेणियों में भी थोड़ी राहत संभव है। इससे होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई वह माल ढुलाई से पूरी करने की कोशिश करेंगे।

दिनेश त्रिवेदी ने अपने बजट में साधारण दर्जो में 2 पैसे और स्लीपर क्लास में 5 पैसे प्रति किलोमीटर की वृद्धि का प्रस्ताव किया था। जबकि वातानुकूलित श्रेणियों में क्रमश: 10 पैसे [थर्ड एसी], 15 पैसे [सेकेंड एसी] और 30 पैसे [फ‌र्स्ट एसी] प्रति किलोमीटर की वृद्धि की थी। सूत्रों के अनुसार तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी की मंशा है कि साधारण दर्जे में वृद्धि को पूरी तरह रद किया जाए। जबकि स्लीपर क्लास की वृद्धि को घटाकर 2 या 3 पैसे प्रति किलोमीटर पर लाया जाए।

एसी क्लास में वृद्धि के खिलाफ उनका बहुत आग्रह तो नहीं है, लेकिन फिर भी वह मानती हैं कि इन श्रेणियों में की गई वृद्धि भी बहुत ज्यादा है, लिहाजा इनमें भी कुछ न कुछ कमी की जानी चाहिए। उनकी इच्छा है कि थर्ड एसी में बढ़ोतरी को घटाकर 5 पैसे, सेकेंड एसी में 10 पैसे और फ‌र्स्ट एसी में 15 पैसे पर लाया जाना उचित होगा।

अभी रेलवे को यात्री किराए से सालाना लगभग 26 हजार करोड़ रुपये की आय होती है। इसमें से 20 हजार करोड़ रुपये अकेले स्लीपर क्लास से आते हैं। जबकि केवल छह हजार करोड़ वातानुकूलित और साधारण दर्जो से। त्रिवेदी के प्रस्तावों से 2012-13 में रेलवे को 8000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी होने वाली थी। ऐसे में यदि ममता के मुताबिक कटौतियां हुई तो यह फायदा घटकर आधे से भी कम [लगभग 3000 करोड़ रुपये] रह जाएगा।

मौजूदा राजनीतिक हालात में यह उपलब्धि भी रेलवे के लिए कम नहीं होगी। इसकी भरपाई आने वाले समय में रेलवे माल ढुलाई से करने की कोशिश करेगी। जहां रेल बजट से पहले ही माल भाड़ों में 20 फीसद तक की बढ़ोतरी की जा चुकी है।

वैसे यदि वातानुकूलित श्रेणियों में प्रस्तावित किराए में कोई कटौती नहीं होती है और केवल साधारण एवं स्लीपर क्लास में राहत दी जाती है, तो रेलवे को आगामी वित्त वर्ष में 4000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी।

मुकुल राय का जीवन परिचय :

ममता बनर्जी के विश्वसनीय सहयोगी मुकुल राय तृणमूल काग्रेस की स्थापना के समय से पार्टी के साथ हैं। उन्होंने सिंगुर तथा नंदीग्राम में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ आदोलन के समय से पार्टी का पूरा साथ दिया।

57 वर्षीय राय शुरू से राजनीति में नहीं थे। वह 2002 से 2005 के बीच यूनाइटेड बैंक आफ इंडिया में गैर-कार्यकारी निदेशक थे। वह अप्रैल 2006 में पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सदस्य बने। उसी साल अगस्त में वह शहरी विकास मामलों पर समिति के सदस्य के साथ गृह मंत्रालय में सलाहकार समिति के सदस्य नियुक्त हुए।

राय अप्रैल 2008 में पार्टी के अखिल भारतीय महासचिव बने। मई 2009 में वह जहाजरानी राज्यमंत्री बने। ममता बनर्जी के रेल मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद राय को रेल मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 11 जुलाई 2011 को जब राय को असम में गुवाहटी-पुरी एक्सप्रेस के पटरी से उतरने की घटना का वहा जाकर जायजा लेने को कहा, उन्होंने उनके आदेश का उल्लंघन किया। उसी वर्ष 12 जुलाई को मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें रेल विभाग से मुक्त कर दिया गया।

राय का जन्म 17 अप्रैल 1954 में 24 परगना जिले के कंचरापाड़ा में हुआ था। उनके पिता का नाम जुगल नाथ राय तथा मा का नाम रेखा राय है। उन्होंने स्कूली शिक्षा हरनीत उच्च विद्यालय से की। उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से बीएससी पार्ट -1 में दाखिला तो लिया लेकिन डिग्री हासिल नहीं कर पाए। उनका विवाह कृष्णा राय से 14 अगस्त 1980 को हुआ। उनका एक बेटा है।

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