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मानसून की विदाई के बाद भी क्यों बरस रहे बादल? सुपर अल नीनो बिगाड़ रहा खेल या कुछ और है वजह

Published: Mon, 12 Oct 2026 06:40 PM (IST)

मानसून की आधिकारिक विदाई के बावजूद उत्तर भारत में बेमौसम बारिश हुई, जिसकी मुख्य वजह सुपर अल नीनो और पश्चिमी विक्षोभ हैं।

देश के कई राज्यों में बेमौसम बारिश (फोटो-ANI)

देश के कई राज्यों में बेमौसम बारिश (फोटो-ANI)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मानसून की आधिकारिक विदाई के बावजूद उत्तर भारत में मौसम ने अचानक नया मोड़ ले लिया। सोमवार को दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में सुबह की शुरुआत झमाझम बारिश, तेज आंधी और बिजली कड़कने के साथ हुई।

बारिश का यह दौर पिछली रात शुरू हो गया था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अचानक हुई यह बारिश इकलौती घटना नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल वेदर पैटर्न में आ रहे बड़े बदलाव और क्लाइमेट चेंज का एक गंभीर हिस्सा है।

क्या है अचानक हुई बारिश की वजह?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बेमौसम बरसात के पीछे मुख्य वजह प्रशांत महासागर में सक्रिय होने वाला सुपर अल नीनो और उत्तर भारत में सक्रिय हुआ वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (NIAS), IISc में चेयर प्रोफेसर और SAFAR के संस्थापक निदेशक प्रोफेसर गुफरान बेग ने इस असामान्य बदलाव को विस्तार से समझाया है।

उनके अनुसार, वर्तमान में जो अल नीनो बन रहा है, वह एक असामान्य सुपर अल नीनो है, जो पिछले दशक के सामान्य अल नीनो से कहीं अधिक शक्तिशाली है।

प्रशांत महासागर का तापमान पहले ही 3.2 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है और अगले दो महीनों में इसके रिकॉर्ड 3.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका है। इसके प्रभाव से इस बार सर्दियां अपेक्षाकृत कम ठंडी होंगी, लेकिन तापमान में अचानक और अत्यधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे।

वहीं दिल्ली-एनसीआर में हुई बारिश को लेकर उन्होंने बताया कि हवा के असामान्य पैटर्न की वजह से ऊपरी वायुमंडल सामान्य से ज्यादा गर्म रहा। इसी दौरान उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के ठंडे बादल मैदानी इलाकों की गर्म और नमी से भरी हवाओं से सीधे टकरा गए। इससे हवा में मौजूद सारी नमी किसी भरे हुए स्पंज की तरह अचानक निचोड़कर बाहर आ गई, जिसके कारण भारी बारिश दर्ज की गई।

मौसम विभाग ने दी चेतावनी

आईएमडी ने देश के कई हिस्सों में सक्रिय मौसम प्रणालियों को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, जहां एक तरफ देश के बाकी हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरी तरह से विदाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं, वहीं दूसरी तरफ दक्षिणी प्रायद्वीप में उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश शुरू होने वाली है।

पिछले 24 घंटों के दौरान जम्मू-कश्मीर में अति भारी बारिश (12 से 20 सेमी) दर्ज की गई, जबकि अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और हरियाणा में 7 से 11 सेमी तक भारी बारिश हुई। इसके अलावा उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ चुनिंदा इलाकों में ओलावृष्टि हुई।

आगामी दिनों के लिए मौसम का पूर्वानुमान

दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब: 12 से 13 अक्टूबर के बीच छिटपुट बारिश के बाद, 14 से 15 अक्टूबर के दौरान बारिश का दायरा काफी व्यापक हो जाएगा। इस दौरान 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएँ (झोंके 60 किमी/घंटा तक), बिजली कड़कने और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की पूरी संभावना है। दिल्ली में इस दौरान तापमान 31 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने और बादल छाए रहने का अनुमान है।

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 13 से 15 अक्टूबर के बीच व्यापक बारिश होगी। हिमाचल प्रदेश में भी 14-15 अक्टूबर को भारी बारिश की उम्मीद है, जबकि उत्तराखंड में 12 से 18 अक्टूबर तक एक लंबा बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत: उत्तर-पूर्वी मानसून की दस्तक के साथ केरल, माहे, तटीय व दक्षिण अंदरूनी कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल और तटीय आंध्र प्रदेश में 15 से 18 अक्टूबर के दौरान भारी बारिश होने के आसार हैं।

पूर्वी, मध्य और पूर्वोत्तर भारत: अंडमान-निकोबार में 12-13 अक्टूबर को व्यापक बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा 18 अक्टूबर तक ओडिशा, पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर के राज्यों में रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना है।