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शवों के सम्मान में अनूठा संकल्प: छत्तीसगढ़ के मोहन ने 10 साल से त्यागा दिन का भोजन, शराब से बनाई दूरी

Published: Wed, 14 Oct 2026 02:00 AM (IST)

छत्तीसगढ़ में धमतरी जिला अस्पताल के चीरघर में पोस्टमार्टम में सहयोग करने वाले स्वीपर मोहन वाल्मीकि पिछले 10 साल से ...और पढ़ें

शवों के सम्मान में 10 साल से दिन का भोजन त्यागा, शराब को नहीं लगाया हाथ (सांकेतिक तस्वीर)

शवों के सम्मान में 10 साल से दिन का भोजन त्यागा, शराब को नहीं लगाया हाथ (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. छत्तीसगढ़ के धमतरी में मोहन वाल्मीकि पोस्टमार्टम में करते हैं सहयोग

  2. जिला अस्पताल में 16 साल की उम्र में शुरू किया शव विच्छेदन का काम

जेएनएन, धमतरी। मौत के बाद हर व्यक्ति सम्मानजनक विदाई का हकदार है। इसी भावना को अपने जीवन का संकल्प बना चुके छत्तीसगढ़ में धमतरी जिला अस्पताल के चीरघर में पोस्टमार्टम में सहयोग करने वाले स्वीपर मोहन वाल्मीकि पिछले 10 साल से दिन का भोजन नहीं करते।

उन्होंने कहा कि ये शवों के प्रति सम्मान जताने का उनका तरीका है। वह पूरे दिन सिर्फ चाय पीकर रहते हैं। बस एक बार रात में करीब 11 बजे भोजन करते हैं। उन्होंने कभी शराब को भी हाथ नहीं लगाया।

मोहन बताते हैं कि उनके पिता भी जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम में सहयोग करते थे। जब मैं 10वीं कक्षा में था, उसी दौरान पिता बहुत बीमार पड़ गए।

इस कारण घर चलाने के लिए 16 साल की उम्र में पोस्टमार्टम के दौरान शरीर के विच्छेदन के काम में उतरना पड़ा। शुरुआत में शव और खून देखकर हाथ कांपते थे।

शुरुआती एक साल तक उन्होंने सब्जी नहीं खाई, क्योंकि आंखों के सामने शवों की तस्वीरें घूमती थीं। पहले उन्हें पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के दौरान उल्टी हो जाती थी, इसलिए उन्होंने दिन का भोजन छोड़ा।

लेकिन बाद में यह दिनचर्या उन्होंने शवों के प्रति सम्मान और अपने काम के साथ जुड़ी संवेदनाओं के कारण अपनाए रखी। आज उनकी आयु 42 साल हो गई है और अब तक वे हजारों पोस्टमार्टम में सहयोग कर चुके हैं।

मोहन जीवनदीप समिति के तहत जिला अस्पताल में कलेक्टर दर पर स्वीपर का काम करते हैं। उन्हें हर महीने 10 हजार रुपये मानदेय मिलता है। वह लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं, जो अब तक पूरी नहीं हुई है।