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'वे हमारे ही लोग हैं, हमारी अगली पीढ़ी हैं, उन पर आंख मूंदकर भरोसा', बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत

Published: Thu, 06 Aug 2026 06:52 PM (IST)Updated: Fri, 07 Aug 2026 12:19 AM (IST)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि Gen-Z विरोध प्रदर्शन करने से देश-विरोधी नहीं हो जाते।

HighLights

  1. मोहन भागवत ने Gen-Z छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर टिप्पणी की।

  2. कहा, विरोध प्रदर्शन से छात्र देश-विरोधी नहीं हो जाते।

  3. समस्याओं का समाधान केवल बातचीत के माध्यम से ही संभव है।

राज्य ब्यूरो, मुंबई । देश में नीट समेत कई और प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक पर उद्वेलित हो रहे युवाओं के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को जेन-जी और जेन-अल्फा से न केवल संवाद साधा, बल्कि खुलकर उनके सारे सवालों के जवाब भी दिए।

उन्होंने न सिर्फ जेन-जी पर आंख मूंदकर भरोसा जताया, बल्कि बेरोजगारी, आरक्षण और एलजीबीटीक्यू जैसे मुद्दों पर भी खुलकर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों की शिकायतें जायज हैं। उन्हें राष्ट्र-विरोधी बताने की कोशिशों का विरोध करते हुए भागवत ने कहा कि देश के युवा बातचीत के हकदार हैं, क्योंकि वे ही अगली पीढ़ी हैं।

किसी मुद्दे का विरोध करने से जेन-जी देशविरोधी नहीं हो जाता।जेन-जी के साथ मोहन भागवत का यह संवाद 'इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइटेड नेशंस' (आइआइएमयूएन) के 15वें सम्मेलन में आयोजित किया गया। छह से आठ अगस्त तक चलने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन में 15 से 19 वर्ष आयुवर्ग के 2000 से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया।

जेन-जी की ओर से संवाद कर रहे प्रश्नकर्ता के एक सवाल पर मोहन भागवत ने कहा कि नई पीढ़ी भी समाज का अभिन्न हिस्सा है। उनका सोच और सवालों को समझने के लिए बातचीत जरूरी है। उन्होंने कहा कि मतभेदों के बावजूद संवाद और चर्चा जारी रहनी चाहिए क्योंकि हर समस्या का समाधान आपसी बातचीत से ही संभव है।

भागवत ने कहा कि अगर जेन-जी किसी मुद्दे पर विरोध कर रहा है, तो वह देशविरोधी नहीं हो जाता। वे हमारे ही लोग हैं। हमारी अगली पीढ़ी हैं। मैं आंख मूंदकर जेन-जी पर विश्वास रखूंगा। उन्होंने कहा, "जो कुछ भी हुआ है, शिकायत जायज है। भारतीय शिक्षा व्यवस्था में अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। चूंकि ऐसा नहीं हो रहा है, इसलिए इस पर चर्चा हो रही है।"

संघ प्रमुख ने कहा कि जब दूसरे रास्ते काम नहीं आते, तो विरोध-प्रदर्शन एक जायज लोकतांत्रिक तरीका होता है। यह भी संवाद और सहमति बनाने का एक तरीका है। संविधान और बीआर आंबेडकर के विचारों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध के तय तरीके और नियम होते हैं। प्रदर्शन किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार के लिए होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जेन-जी और जेन-अल्फा सवाल पूछते हैं; उन्हें तार्किक जवाब चाहिए। यह नई पीढ़ी (जेन-जी व जेन-अल्फा) हमारी मौजूदा पीढ़ी से अधिक ईमानदार है। देशभक्ति और सेवा की ईमानदार अपील उन पर असर करती है। दिल्ली में जेन-जी के आंदोलन के दौरान पैलेट गन क्यों चलानी पड़ी, इसका उत्तर में उन्होंने कहा कि इसका कारण हमें पता नहीं है, यह पता करना होगा।

देश की शिक्षा व्यवस्था से संबंधित एक प्रश्न पर संघ प्रमुख ने कहा कि शिक्षा अगली पीढ़ी का निर्माण करने के लिए होनी चाहिए, न कि व्यवसाय के लिए। उन्होंने शिक्षा सुधार के लिए 2024 में बनी राधाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार बजट का छह प्रतिशत शिक्षा के लिए आवंटित करने का समर्थन तो किया, लेकिन साथ ही कहा कि समाज को शिक्षित करना सिर्फ सरकार का काम नहीं है।

उन्होंने संघ से जुड़े संगठन विद्या भारती द्वारा चलाए जा रहे कई हजार विद्यालयों का उदाहरण देते हुए कहा कि सामाजिक संगठनों को भी समाज को शिक्षित करने के लिए आगे आना चाहिए। एक सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि हम एक तरफ अहिंसा की बात करते हैं, दूसरी तरफ हिंसा करने वालों को अपना रोल माडल मानते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।

कुछ देशों में बच्चों के लिए इंटरनेट मीडिया को प्रतिबंधित किए जाने के सवाल पर संघ प्रमुख ने कहा कि हमें इस मामले में स्वनियंत्रण की विधि अपनानी चाहिए। वरना कोई चीज प्रतिबंधित करने पर वह दूसरे तरीके से और ज्यादा वेग के साथ फैलना शुरू हो जाती है।

सिर्फ भाषण देना और चुनाव जीतना ही सच्चा नेतृत्व नहीं

भागवत ने कहा कि असली नेतृत्व का मतलब भाषण देना, चुनाव जीतना या लोगों को उपदेश देना नहीं है, बल्कि पर्दे के पीछे रहकर काम करना और सफलता व शोहरत को साझा करना है। एक सच्चे नेता के गुणों का जिक्र करते हुए भागवत ने एक संस्कृत श्लोक का हवाला दिया और कहा कि एक नेता के पास ज्ञान होना चाहिए, उसे दूसरों के गुणों की सराहना करनी चाहिए, सफलता, शोहरत व भौतिक लाभों को सभी के साथ साझा करना चाहिए और संघर्ष की स्थिति में एक योद्धा की तरह काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेतृत्व का मकसद लोगों को "प्रकाश" की ओर ले जाना और नेता तैयार करना है।

ये भी बोले भागवत

आरक्षण पर बाबा साहेब आंबेडकर के विचार मानें तो कोई समस्या नहीं आएगी। आरक्षण व्यवस्था समाज में समानता लाने के लिए शुरू की गई थी और तब तक जारी रहेगी, जब तक समाज में समानता नहीं आ जाती।

एलजीबीटीक्यू भी समाज का हिस्सा हैं। जब दो समलैंगिकों के विवाह की बात की जाती है, तो यह सिर्फ दो व्यक्तियों का साथ रहना भर नहीं है। यदि समलैंगिक विवाह करना चाहते हैं, तो उनके लिए समाज को स्वीकार्य कानून बनना चाहिए।

राष्ट्रसेविका समिति संघ की एक ‘विंग’ भर नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र संगठन है। पूरी जानकारी नहीं होने से भ्रम होता है। संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में पूरे तीन दिन इसकी प्रतिनिधि भी शामिल होती हैं।

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