गोबरधन योजना से गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर तक, मोदी कैबिनेट के बड़े फैसले
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'गोबरधन योजना' के तहत बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 23,731 करोड़ रुपये और असम में ...और पढ़ें
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मोदी कैबिनेट के फैसले (एआई से बनाई गई तस्वीर)
HighLights
गोबरधन योजना: बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 23,731 करोड़ रुपये।
गुवाहाटी-तेजपुर NH-15 कॉरिडोर: 8,970.20 करोड़ रुपये की लागत से विकास।
दोनों फैसले देश के बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करेंगे।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश के बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए दो महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। एक ओर भारत में बायोगैस के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 23731 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट वाली 'गोबरधन योजना' को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक प्रेस कांफ्रेंस में यह जानकारी दी।
यह योजना साल 2026-27 से लेकर 2035-36 तक लागू की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) को भारत के भविष्य के ऊर्जा क्षेत्र का एक मजबूत हिस्सा बनाना है।
इस योजना में क्या होगा खास?
बता दें कि इस योजना के तहत खेतों के अवशेष (पराली आदि), पशुओं का गोबर, गन्ने की मैला (प्रेस मड), शहरी गीला कचरा और अन्य जैविक कचरे को साफ ईंधन और जैविक खाद में बदला जाएगा। इससे ग्रामीण इलाकों में लोगों की आय बढ़ेगी और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
बायोगैस सेक्टर के बढ़ावा पर सरकार का जोर
गोबरधन योजना के तहत सरकार बायोगैस सेक्टर को आगे बढ़ाने के लिए कई अहम कदम उठाने जा रही है। इसके तहत सरकार का फोकस गैस की पक्की मांग और सही कीमतें तय करना। प्लांट लगाने के लिए आर्थिक मदद।
गैस पहुंचाने के लिए पाइपलाइन का बुनियादी ढांचा तैयार करने के अलावा इसके लिए आसानी से लोन मिलना और नई तकनीक का विकास करना है। कुल मिलाकर इस योजना से न केवल देश में प्रदूषण कम होगा, बल्कि गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
गुवाहाटी-तेजपुर एनएच-15 कॉरिडोर को मंजूरी
दूसरी ओर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने असम में कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को बड़ा बढ़ावा देते हुए 8,970.20 करोड़ रुपये की लागत से गुवाहाटी-तेजपुर एनएच-15 कॉरिडोर (135.871 किमी) के विकास को मंजूरी दे दी है।
यह चार लेन वाला एक्सेस-कंट्रोल हाईवे होगा, जिसे 'बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर' (BOT) टोल मोड पर विकसित किया जाएगा। इस परियोजना से असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच आवागमन बेहद आसान और तेज हो जाएगा।
क्यों खास है यह प्रोजेक्ट?
इस प्रोजेक्ट के तहत तेजपुर बाईपास पर 4.9 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) बनाई जाएगी, जिसे भारतीय वायुसेना (IAF) के साथ मिलकर तैयार किया गया है। इससे ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिण में स्थित मौजूदा एनएच-27 पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा। भीड़भाड़ वाले इलाकों जैसे बैहाता चियारी, सिपाझार, खखरुपेटिया, डेकियाजुली और तेजपुर से गुजरने वाले रास्तों पर ट्रैफिक कम करने के लिए 5 बड़े बाईपास बनाए जाएंगे।
शानदार आधुनिक ढांचा पर फोकस
इस पूरे मार्ग पर 15 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 19 फ्लाईओवर, 46 अंडरपास और हाथियों की सुरक्षा के लिए तेजपुर बाईपास पर 1 एलीफेंट अंडरपास बनाया जाएगा। इस कॉरिडोर के बनने से यात्रा की औसत रफ्तार दोगुनी हो जाएगी और सफर का समय आधा रह जाएगा। इससे ईंधन की बचत होगी और वाहन चलाने का खर्च घटेगा।
किन क्षेत्रों को मिलेगा फायदा?
- औद्योगिक विकास- 8 पीएम गति-शक्ति आर्थिक जोन।
- सामाजिक और पर्यटन स्थल- दारांग और उदलगुरी जैसे आकांक्षी जिले, मां कामाख्या मंदिर, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और ओरंग राष्ट्रीय उद्यान।
- लॉजिस्टिक और परिवहन- 3 प्रमुख रेलवे स्टेशन, 2 हवाई अड्डे और 2 जलमार्ग टर्मिनल।
