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'जब दिल में प्यार ही नहीं तो...', ठाकरे बंधुओं में फिर खटपट? MNS की सोशल मीडिया पोस्ट ने मचाई हलचल

Published: Sun, 22 Feb 2026 01:53 PM (IST)Updated: Sun, 22 Feb 2026 02:54 PM (IST)

मुंबई नगर निगम चुनावों के बाद उद्धव और राज ठाकरे के गठबंधन में खटपट शुरू हो गई है। यह विवाद ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। महाराष्ट्र में मुंबई नगर निगम चुनावों से पहले उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक साथ आए थे। इस गठबंधन को हुए दो महीने का वक्त भी नहीं बीत पाया कि इनके बीच खटपट की खबरें आने लगी हैं। ये दोनों भाई बीएमसी में नॉमिनेटेड पार्षदों को लेकर आमने-सामने हैं।

एनडीटीवी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेताओं ने कुछ अजीब मैसेज पोस्ट किए हैं। जैसे, "जब दिल में प्यार ही नहीं है तो प्यार क्यों करना?" हालांकि, उद्धव ठाकरे कैंप ने इस सोशल मीडिया पोस्ट को ज्यादा अहमियत नहीं दी है और कहा है कि दोनों भाई एक रहेंगे।

क्या है इस खटपट की वजह?

इस कथित झगड़े के केंद्र में कॉर्पोरेटर्स का नॉमिनेशन है। 227 चुने हुए कॉर्पोरेटर्स के अलावा, 2023 के बदलाव के बाद बीएमसी में अब 10 नॉमिनेटेड कॉर्पोरेटर्स हैं। राजनीतिक दल इन कॉर्पोरेटर्स को सदन में अपनी संख्या के हिसाब से नॉमिनेट करेंगे।

हाल ही में हुए नगर निगम चुनावों में 65 सीटें जीतने वाली उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) 10 में से तीन पार्षदों को नॉमिनेट कर सकती है, जबकि 89 सीटें जीतने वाली भाजपा 4 पार्षदों को नॉमिनेट कर सकती है। कांग्रेस, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और एआईएमआईएम बाकी तीन पार्षदों को चुनेंगी।

उद्धव ने ठुकराई राज की मांग

सूत्रों के मुताबिक, यूबीटी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाली राज ठाकरे की एमएनएस ने तीन में से एक नॉमिनेटेड सीट मांगी है। बता दें कि एमएनएस ने बीएमसी चुनावों में सिर्फ छह सीटें जीती थीं। सूत्रों ने बताया कि उद्धव ठाकरे ने एमएनएस की मांग ठुकरा दी है, जिससे गठबंधन में तनाव पैदा हो गया है।

राज की शिंदे से मुलाकात से भी बड़ी हलचल

इस बीच, राज ठाकरे की डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के साथ हाल ही में हुई मीटिंग से ये अफवाहें और तेज हो गई हैं। एमएनएस नेता अविनाश अभ्यंकर ने कहा कि पार्टी ने हाल ही में संगठन के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए अपने राज्य के बड़े नेताओं से मुलाकात की।

नॉमिनेटेड कॉर्पोरेटर्स के मुद्दे पर उन्होंने कहा, "यह दो भाइयों और दो पार्टियों के बीच का अलायंस है। राज ठाकरे तय करेंगे कि उद्धव ठाकरे की पार्टी के कोटे में सीट लेनी है या नहीं। अभी कोई आखिरी फैसला नहीं हुआ है। राज ठाकरे और पार्टी के सीनियर लीडर्स इस पर फैसला लेंगे।"

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