'यह तो बड़ी समस्या है', चुनाव के तुरंत बाद विधायकों के इस्तीफे पर मद्रास HC ने जताई चिंता
मद्रास हाई कोर्ट ने चुनाव के तुरंत बाद विधायकों के इस्तीफे और फिर दूसरी पार्टी से उपचुनाव लड़ने को एक गंभीर समस्या बताया है।

विधायकों के दूसरी पार्टी में शामिल होने पर हाई कोर्ट की टिप्पणी। (फाइल फोटो।)
HighLights
विधायकों के इस्तीफे और उपचुनाव लड़ने पर मद्रास HC चिंतित।
कोर्ट ने इसे मतदाताओं के अधिकारों का उल्लंघन बताया।
चुनाव आयोग को दिशानिर्देश बनाने का निर्देश दिया गया।
डिजिटल डेस्क, चेन्नई। मद्रास हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए कहा कि चुने गए विधायकों का चुनाव के तुरंत बाद इस्तीफा देना और फिर दूसरी पार्टी के चुनाव चिह्न पर तुरंत चुनाव लड़ना एक समस्या है। जस्टिस एस.एम. सुब्रमण्यम और जस्टिस के. गोविंदराजन की डिवीजन बेंच ने बुधवार को सुनवाई के दौरान ये बातें कहीं।
यह पीआईएल मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा क्षेत्रों के लिए 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव को रोकने के लिए दायर की गई थी। ये उपचुनाव इसलिए हो रहे हैं क्योंकि एआईएडीएमके के दो विधायकों ने सदन की सदस्यता छोड़ दी और टीवीके में शामिल हो गए, जिसने उन्हें उन्हीं सीटों से उम्मीदवार बनाया है।
हाई कोर्ट ने जताई चिंता
हाई कोर्ट ने वोटरों के अधिकारों को लेकर भी चिंता जताई। बेंच ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह वोटरों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठाए। साथ ही कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि क्या ऐसी किसी खास स्थिति से निपटने के लिए कोई गाइडलाइन है, जिसमें कोई विधायक चुने जाने के तुरंत बाद इस्तीफा दे देता है और फिर उसी इस्तीफे की वजह से होने वाले उपचुनाव में दोबारा चुनाव लड़ता है।
चुनाव प्रक्रिया में कोर्ट नहीं दे सकता दखल
उपचुनाव रोकने के लिए कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार करते हुए बेंच ने कहा कि एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद कोर्ट उसमें दखल नहीं दे सकता।
याचिकाकर्ता वकील के. सुथन चाहते थे कि कोर्ट इलेक्शन कमीशन को निर्देश दे कि वह उन चुने हुए प्रतिनिधियों की वित्तीय जवाबदेही तय करने के लिए कोई सिस्टम बनाने के वास्ते जरूरी कानूनी और रेगुलेटरी उपाय करे, जो बिना किसी कानूनी रूप से मान्य और ठोस वजह के अपनी मर्जी से और समय से पहले अपनी सीट से इस्तीफा दे देते हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि इसके कारण होने वाले उपचुनाव का खर्च वसूलने के लिए चुनाव खर्च सुरक्षा शुरू की जाए। साथ ही उन्होंने ऐसे उपाय करने का भी सुझाव दिया जिनसे चुने हुए प्रतिनिधि, जो अपनी मर्जी से और समय से पहले इस्तीफा दे देते हैं उन्हें एक तय समय तक अगले चुनाव लड़ने से रोका जा सके। इसके लिए कानूनी तौर पर अयोग्य घोषित करने या उचित कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू करने जैसे उपाय किए जा सकते हैं।
