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'बड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करना लगभग नामुमकिन', मद्रास हाई कोर्ट ने जताया अफसोस

Published: Tue, 08 Sep 2026 12:21 PM (IST)

मद्रास हाई कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामलों में ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को 'लगभग नामुमकिन' बताया।

आईएएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर मद्रास हाई कोर्ट ने जताया अफसोस। (फाइल फोटो।)

आईएएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर मद्रास हाई कोर्ट ने जताया अफसोस। (फाइल फोटो।)

HighLights

  1. मद्रास हाई कोर्ट ने भ्रष्टाचार पर गंभीर चिंता जताई।

  2. ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारियों पर कार्रवाई करना मुश्किल।

  3. केंद्र सरकार की मंजूरी में देरी पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।

डिजिटल डेस्क, चेन्नई। मद्रास हाई कोर्ट ने सोमवार को अफसोस जताते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में ऊंचे पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना, यहां तक कि चार्जशीट दाखिल करना भी लगभग नामुमकिन है।

कोर्ट ने कहा, "भारतीय अब ऐसे दौर में पहुंच गए हैं जहां वे भ्रष्टाचार को देखकर नाराज नहीं होते।" जस्टिस एन आनंद वेंकटेश ने यह टिप्पणी तब की जब उन्होंने पूर्व एआईएडीएमके मंत्री एस पी वेलुमणि से जुड़े कॉरपोरेशन टेंडर घोटाले में आईएएस अधिकारियों के एस कंधसामी और एम के विजया कार्तिकेयन पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देने में केंद्र सरकार की ओर से हुई देरी पर निराशा जताई।

'केंद्र के रवैये में भी कोई फर्क नहीं'

इसके बाद कोर्ट ने कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के संबंधित अधिकारी को 19 सितंबर को दोपहर 2.15 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट के सामने पेश होने का निर्देश दिया। जज ने कहा, "एक तरफ केंद्र सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ बात कर रही है तो दूसरी तरफ ऐसा हो रहा है। यानी केंद्र के रवैये में भी कोई फर्क नहीं है। क्या भ्रष्टाचार के मामले से जुड़ी फाइल पर कार्रवाई करने के लिए कोई समय-सीमा नहीं है?"

क्या है मामला?

यह मामला अराप्पोर इयक्कम द्वारा डायरेक्टोरेट ऑफ विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन (DVAC) के खिलाफ दायर की गई कोर्ट की अवमानना याचिका से जुड़ा है। यह याचिका पिछली एआईएडीएमके सरकार के दौरान चेन्नई और कोयंबटूर कॉरपोरेशन में टेंडर में हुई गड़बड़ियों के मामले में कोर्ट के आदेश का पालन न करने को लेकर दायर की गई थी।

एनजीओ के अनुसार, जब एस पी वेलुमणि नगर प्रशासन मंत्री थे तब डीवीएसी ने चेन्नई और कोयंबटूर कॉरपोरेशन में अलग-अलग नागरिक कार्यों के लिए कॉन्ट्रैक्ट देने में 98.25 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज किया था।

याचिकाकर्ता ने बताया कि राज्य सरकार इस मामले में शामिल छह अन्य सरकारी अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी तय समय के भीतर देने में सफल रही थी। हालांकि, सरकार दो आईएएस अधिकारियों के खिलाफ मंजूरी लेने में हुई भारी देरी की वजह बताने में नाकाम रही।

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