जेएनएन, नई दिल्ली। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में दो नाबालिग हिंदू लड़कियों रवीना और रीना को अगवा करके उनको जबरन मुस्लिम बनाकर उनका निकाह करने का मामला सामने आने के बाद भले ही पाकिस्तान सरकार ने पीडि़त परिवार को न्याय दिलाने की बात कही हो, लेकिन इसका कोई असर जमीन पर नहीं दिख रहा है। हिंदू लड़कियों को अगवा करने का सिलसिला थमने के बजाय तेज होता जा रहा है।

रीना और रवीना के अगवा होने के बाद से हिंदू लड़कियों को गायब करने के सिलसिले में तेजी से हिंदू समाज आतंकित है। पाकिस्तान में नाबालिग हिंदू लड़कियों को अगवा कर उन्हें जबरन मुसलमान बनाए जाने को मामले को उजागर करने वाली पाकिस्तानी पत्रकार वींगस ने हिंदू कार्यकर्ताओं के हवाले से बताया कि गुरुवार को सिंध प्रांत के सक्खर से दस साल की एक और हिंदू लड़की लक्ष्मी को अगवा कर लिया गया। उनके अनुसार बीते एक माह में कम से कम 13 हिंदू लड़कियों को अगवा किया जा चुका है। एक दिन पहले ही सिंध के बादिन इलाके से 15 साल की हिंदू लड़की माला को अगवा कर लिया गया था।

पाकिस्तान के हिंदू कार्यकर्ताओं के मुताबिक होली के दिन रीना और रवीना को अगवा किए जाने के बाद से वे तत्व और ज्यादा बेखौफ नजर आ रहे हैं जो नाबालिग हिंदू लड़कियों को अगवा कर उनका निकाह कराने का धंधा कर रहे हैं। ऐसे तत्वों में मियां मिट्ठू खासा कुख्यात है। उसने खुले आम कह रखा है कि उसका मकसद हर साल कम से कम सौ हिंदू लड़कियों को मुसलमान बनाना है। उसके रसूख का पता इससे चलता है कि उसे इमरान खान से लेकर पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष कमर जावेद बाजवा भी कौम की सेवा करने वाला मौलवी बताते हैं।

मियां मिट्ठू जैसे लोगों को पाकिस्तान के नेताओं, धार्मिक नेताओं और पुलिस का भी संरक्षण हासिल रहता है। इसी कारण पुलिस तब तक कुछ नहीं करती जब तक नाबालिग अगवा हिंदू लड़कियों को मुसलमान बनाकर उनका निकाह नहीं कर दिया जाता। जब पीडि़त परिवार न्याय न मिलने की गुहार लगाता है तो पुलिस इस आशय के दस्तावेज पेश कर देती है कि लड़कियों ने तो अपनी मर्जी से इस्लाम कुबूल कर लिया है।

पीडि़त परिवार जब अदालत का दरवाजा खटखटाता है तो भी अगवा की गई लड़कियों को उनके मां-बाप को सौंपने के बजाय पुलिस उन्हें महिला आश्रय स्थल भेज देती है। आम तौर पर अदालतें उन दस्तावेजों को सही मान लेती हैं जो कथित तौर पर यह कह रहे होते हैं कि नाबालिग हिंदू लड़कियों ने अपनी मर्जी से इस्लाम कुबूल कर लिया है। इसके अतिरिक्त अगवा की गईं हिंदू लड़कियां भी कई बार डर की वजह से अदालत के समक्ष यह कह देती हैं कि उन्होंने अपनी इच्छा से इस्लाम स्वीकार कर लिया है।

रवीना और रीना के मामले में यह सामने आया है कि जब तक पुलिस कुछ करती तब तक उनका धर्मांतरण करके उनका नाम आयशा और शाजिया रख दिया गया। इसके एक बाद उनकी शादी ऐसे लोगों के साथ करा दी गई जिनकी पहले से ही शादी हो चुकी है। इन दोनों मुस्लिम युवकों के बच्चे भी हैं। हिंदू कार्यकर्ताओं के मुताबिक इससे साफ है कि रीना और रवीना को जबरन मुसलमान बनाया गया।

इन कार्यकर्ताओं का सवाल है कि आखिर आज तक किसी नाबालिग या बालिग हिंदू लड़के के मामले में यह सामने क्यों नहीं आया कि उसने अपने घर से भागकर अपनी इच्छा से इस्लाम कुबूल कर लिया है? उनका यह भी सवाल है कि क्या ऐसे किसी हिंदू लड़के की शादी किसी मुस्लिम लड़की से कराई गई है?

Posted By: Sanjeev Tiwari

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