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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 28, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पोषण का पावरहाउस मोटे अनाजों की छोटी-छोटी बातें, मांग बढ़ेगी; तभी बढ़ेगा उत्पादन

By Jagran NewsEdited By: Sanjay Pokhriyal
Published: Mon, 28 Nov 2022 03:29 PM (IST)

मोटे अनाजों को पोषण का पावर हाउस कहा जाता है। अप्रैल 2018 में कृषि मंत्रालय ने इन्हें पोषक अनाज की ...और पढ़ें

10 प्रतिशत से भी कम लोग खाते हैं मोटे अनाज
10 प्रतिशत से भी कम लोग खाते हैं मोटे अनाज

नई दिल्‍ली, जेएनएन। भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष (इंटरनेशनल मिलेट्स ईयर) घोषित किया है। भारत सरकार ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। केंद्र सरकार इन अनाजों को पोषक अनाज के तौर प्रस्तुत कर रही है। हालांकि अभी इस दिशा में लोगों को जागरूक करने के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

पोषण का पावरहाउस हैं ये अनाज

मोटे अनाजों को पोषण का पावर हाउस कहा जाता है। अप्रैल, 2018 में कृषि मंत्रालय ने इन्हें पोषक अनाज की संज्ञा दी थी। पोषक अनाजों की श्रेणी में ज्वार, बाजरा, रागी, चीना, कोदो, सावां, कुटकी, कुट्टू और चौलाई शामिल हैं। कर्नाटक के कृषिविभाग ने आइसीएआर-इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मिलेट्स रिसर्च के साथ म मिलकर मोटे अनाजों क पोषण पर रिपोर्ट तैयार की थी। इससे इन अनाजों से मिलने वाले पोषण को समझा जा सकता है।

सभ्यताओं की मिटी है भूख

अध्ययन बताते हैं कि सभ्यता के विकास क्रम में मनुष्य ने जिन अनाजों की खेती शुरू की थी, उन शुरुआती अनाजों में मोटे अनाज ही थे। 3000 ईसा पूर्वसिंधु घाटी सभ्यता क समय में भी मोटे अनाजों को प्रमाण मिलता है। आज इस श्रेणी क कई अनाज उगाए जा रहे हैं।

10 प्रतिशत से भी कम लोग खाते हैं मोटे अनाज

गांवों एवं शहरों में मोटे अनाज की खपत को लेकर करीब एक दशक पहले सर्वेक्षण हुआ था। सर्वेक्षण क ने तीजे कतई उत्साहजनक नहीं थे। इसके मुताबिक, 10 प्रतिशत से भी कम लोग मोटे अनाज खाते हैं।

खाद्य सुरक्षा कानून में भी उल्लेख

राष्ट्रीय खा्य सुरक्षा कानून, 2013 में कहा गया है कि पात्र परिवारों को तीन रुपये किलो चावल, दो रुपये किलो गेहूं और एक रुपये किलो की दर से मोटे अनाज दिए जाएंगे। हालांकि इनकी सरकारी खरीद बहुत कम रही है। राशन की दुकानों के माध्यम से मोटे अनाजों केवितरण की दिशा में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं दिखी है।

इन राज्यों में होता है उत्पादन

भारत में ज्वार का उत्पादन मुख्यत: महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और मध्य प्रदेश में होता है। बाजरे का उत्पादन में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक आगे हैं।

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