ग्‍वालियर, एजेंसियां। मध्‍य प्रदेश के ग्‍वालियर में बुधवार सुबह वायुसेना का एक MiG 21 Trainer विमान क्रैश हो गया। इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। समय रहते ही विमान से एक ग्रुप कैप्टन और स्क्वाड्रन लीडर समेत दोनों पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे हैं। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विमान नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर था जो ग्‍वालियर एयरबेस के नजदीक सुबह 10 बजे के करीब दु‍र्घटना का शिकार हो गया। भारतीय वायु सेना ने इस हादसे की कोर्ट ऑफ इन्‍क्‍वायरी के आदेश दिए हैं। कर्नल रैंक के एक अधिकारी को इस हादसे की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

गौरतलब है कि इस साल मिग क्रैश होने की यह तीसरी घटना है। हाल के दिनों में मिग विमानों के क्रैश होने की घटनाएं बेहद आम हो गई हैं। करीब पांच दशक पुराने इन विमानों को बदलने की मांग लंबे वक्‍त से हो रही है। उड़ता ताबूत के तौर पर बदनाम इन विमानों को हल्‍के स्‍वदेशी तेजस से बदलने की भी चर्चाएं हो रही हैं। 

अभी एक हफ्ते पहले ही कर्नाटक के चित्रदुर्गा में डीआरडीओ का मानव रहित एयर व्‍हीकल (UAV) दुर्घटनाग्रस्‍त हो गया था। चित्रदुर्गा जिले के डीआरडीओ के टेस्‍ट रेंज, चैलकेरे एरोनॉटिकल टेस्ट रेंज (एटीआर) में इसका परीक्षण किया जा रहा था। यही नहीं एक महीने पहले ही असम के तेजपुर में वायुसेना का सुखोई-30 विमान क्रैश हो गया था। इस हादसे में भी दोनों पायलट सुरक्षित बच गए थे। बताया जाता है कि दुर्घटना के वक्त Su-30 विमान नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर था। 

उल्‍लेखनीय है कि भारतीय वायुसेना के बेड़े में MiG विमानों के साथ पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। इसी साल मार्च महीने में राजस्थान के बीकानेर में भारतीय वायुसेना का मिग-21 बाइसन लड़ाकू विमान क्रैश हो गया था। हालांकि, इस हादसे में भी पायलट ने विमान क्रैश होने से पहले ही पैराशूट से छलांग लगा दी थी। इसी महीने में राजस्थान के जोधपुर में मिग-27 यूपीजी विमान क्रैश हो गया था जिसमें पायलट ने समय रहते इजेक्‍ट करके अपनी जान बचा ली थी। 

बता दें कि भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के दुर्घटनाग्रस्‍त होने के मामलों को लेकर फरवरी में दाखिल एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी तल्‍ख टिप्‍पणी की थी। सुप्रीम कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश ने कहा था कि वायुसेना के मिराज विमान काफी पुराने हैं जो क्रैश होने ही हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को जुर्माना लगाने की चेतावनी देते हुए याचिका को खारिज कर दिया था। याचिका में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग की गई थी। 

Posted By: Krishna Bihari Singh

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