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अब पकड़े जाएंगे घुसपैठिए... जनसांख्यिकीय 'अस्वाभाविक' बदलाव पर MHA के पैनल ने जनता से मांगी राय

Published: Fri, 16 Oct 2026 08:13 AM (IST)

उच्च-स्तरीय समिति ने देश के कुछ हिस्सों में अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय बदलावों के कारणों और प्रभावों पर आम नागरिकों से राय मांगी है।

अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय बदलाव पर जनता से मांगी गई राय। (फाइल फोटो।)

अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय बदलाव पर जनता से मांगी गई राय। (फाइल फोटो।)

HighLights

  1. समिति ने जनसांख्यिकीय बदलावों पर जनता से राय मांगी।

  2. पोर्टल पर कारणों और प्रभावों पर सुझाव दे सकते हैं।

  3. अवैध प्रवासियों की पहचान, निर्वासन पर फोकस।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के कुछ हिस्सों में अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय बदलावों के कारणों और प्रभावों का अध्ययन करने वाली उच्च-स्तरीय समिति ने आम नागरिकों से उनके परिचित इलाकों में पिछले 15 वर्षों के दौरान देखे गए या अध्ययन किए गए प्रमुख जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर उनकी राय मांगी है।

ये पूरे भारत में गांव, कस्बे, शहर, जिले, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश या अन्य क्षेत्र हो सकते हैं। उच्च-स्तरीय समिति द्वारा अपने समर्पित पोर्टल पर अपलोड किए गए एक प्रश्नावली के माध्यम से लोग जनसांख्यिकीय बदलावों के कारणों के बारे में अपनी राय दे सकते हैं। साथ ही वे यह भी बता सकते हैं कि इन बदलावों का रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आवास, बुनियादी ढांचे, पर्यावरण, सामाजिक सद्भाव और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है।

लोग दे सकते हैं पांच सुझाव

उन्हें जनसांख्यिकीय बदलावों के कारण पैदा होने वाली चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताने के लिए कहा गया है। लोग इन चुनौतियों से निपटने के लिए पांच सुझाव भी दे सकते हैं। जवाब देने वाले लोग अपने जवाबों के साथ दस्तावेज भी संलग्न कर सकते हैं।

समिति का अनुरोध है कि जहां भी संभव हो लोग अपने जवाबों के समर्थन में सबूत दें। इनमें रिसर्च रिपोर्ट, सर्वे के नतीजे, केस स्टडी, तस्वीरें, ऑडियो-विजुअल दस्तावेज, नक्शे, सरकारी रिकॉर्ड, अदालती रिकॉर्ड, मीडिया रिपोर्ट, प्रकाशन या अन्य कोई भी प्रासंगिक सबूत शामिल हो सकते हैं।

अलग-अलग प्रश्नावली उपलब्ध

बुधवार को समिति के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर (रिटायर्ड) द्वारा उद्घाटन किए गए इस पोर्टल पर अलग-अलग हितधारकों के लिए अलग-अलग प्रश्नावली उपलब्ध हैं। इन हितधारकों में केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन, एनजीओ, नागरिक समाज, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, थिंक टैंक, सरकारी कर्मचारियों और छात्रों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

इस पोर्टल के माध्यम से हितधारक किसी ऐसे असामान्य बसावट पैटर्न के कारणों के बारे में इनपुट, डेटा या जानकारी दे सकते हैं जिसने किसी क्षेत्र की जनसांख्यिकीय संरचना को बदल दिया हो।

समिति ने बुधवार को कहा, "ये इनपुट समिति को जनसांख्यिकीय बदलावों के कारणों का विश्लेषण और पहचान करने में मदद करेंगे। साथ ही ये देश में रह रहे अवैध प्रवासियों की कानूनी, निष्पक्ष और समयबद्ध पहचान, हिरासत और निर्वासन के लिए एक सुव्यवस्थित और स्थायी कार्य प्रणाली की सिफारिश करने में भी सहायक होंगे।"

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