दाऊद का गुर्गा सलीम डोला गिरफ्तार, मेफेड्रोन से भारत को तबाह करने की थी साजिश
भारतीय खुफिया एजेंसियों ने दाऊद इब्राहिम के करीबी सलीम डोला को गिरफ्तार कर मेफेड्रोन ड्रग्स सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है।

दाऊद इब्राहिम का करीबी सलीम डोला को गिरफ्तार
HighLights
दाऊद इब्राहिम का करीबी सलीम डोला ड्रग्स के साथ गिरफ्तार।
भारत में मेफेड्रोन फैलाकर युवाओं को बर्बाद करने की थी साजिश।
आईएसआई आतंकी फंडिंग के लिए ड्रग्स व्यापार का कर रही थी उपयोग।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी सहयोगी सलीम डोला को गिरफ्तार कर ड्रग्स सिंडिकेट की कमर तोड़ दी है। यह गिरफ्तारी केवल एक अपराधी की पकड़ नहीं, बल्कि भारत के भविष्य को 'मेफेड्रोन' जैसी जानलेवा लत से बचाने की दिशा में एक बड़ी जीत है।
डोला की साजिश भारतीय बाजारों में नशे की ऐसी बाढ़ लाने की थी, जिससे देश की युवा पीढ़ी पूरी तरह तबाह हो जाए। 'व्हाइट मैजिक', 'म्याऊ-म्याऊ' और 'बबल' जैसे नामों से मशहूर मेफेड्रोन का बाजार पिछले कई वर्षों में भारत में तेजी से फैला है।
सलीम डोला ने इस सिंथेटिक ड्रग को विशेष रूप से युवाओं के बीच इसलिए लोकप्रिय बनाया क्योंकि यह कोकीन के मुकाबले बेहद सस्ती है, जहां कोकीन की कीमत लगभग तीन हजार रुपये प्रति ग्राम है, वहीं मेफेड्रोन मात्र 160 रुपये प्रति ग्राम में उपलब्ध हो जाती है। इसी कम कीमत के कारण यह जहर गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में महामारी की तरह फैल गया।
आंकड़ों के मुताबिक, अकेले मुंबई में 10 में से आठ नशा करने वाले युवा इसी ड्रग की गिरफ्त में हैं। डोला का सिंडिकेट पारंपरिक तरीकों के बजाय बेहद शातिर ढंग से काम कर रहा था।
'डार्क वेब' के जरिये युवाओं को ड्रग्स बनाने की ट्रेनिंग
पुलिस से बचने के लिए उन्होंने पोल्ट्री फार्मों और सड़क किनारे बने ढाबों को अपनी गुप्त लैब बना रखा था। चौंकाने वाली बात यह है कि ये अपराधी 'डार्क वेब' के जरिये युवाओं को ड्रग्स बनाने की ट्रेनिंग दे रहे थे।
डोला का जाल केवल भारत तक ही सीमित नहीं था, बल्कि पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप तक फैला हुआ था। वह भारत में दवा विक्रेताओं और केमिस्टों का एक ऐसा नेटवर्क तैयार कर रहा था, जो देश के कोने-कोने में इस जहर की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित कर सके।
इंटेलिजेंस ब्यूरो के अनुसार, डोला की गिरफ्तारी दाऊद इब्राहिम और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के लिए एक बड़ा झटका है।
दरअसल, आइएसआइ इस ड्रग व्यापार से होने वाली कमाई का इस्तेमाल लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को पालने के लिए करना चाहती थी।
हालांकि, भारतीय एजेंसियों ने भी अपनी चौकसी बढ़ा दी है। 'ऑपरेशन सह्याद्रि चेकमेट' के तहत जहां मोबाइल लैब ध्वस्त की गईं, वहीं तेलंगाना और राजस्थान में भी करोड़ों के ड्रग कारखानों का पर्दाफाश किया गया।
डोला से पूछताछ में अब उसके पूरे सप्लाई चेन और उन 'सफेदपोश' मददगारों के चेहरे बेनकाब होने की उम्मीद है, जो इस मौत के व्यापार में उसके साझीदार थे।
(समाचार एजेंसी आइएएनएस के इनपुट के साथ)
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