मेघालय में 13 लाख टन से ज्यादा कोयला गायब, जिम्मेदारी तय करने की मांग
मेघालय हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त समिति ने 13.02 लाख टन से अधिक 'गायब' कोयले की विस्तृत जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

मेघालय में 13 लाख टन से ज्यादा कोयला गायब। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
HighLights
मेघालय में 13.02 लाख टन से अधिक कोयले के 'गायब' होने का खुलासा।
हाईकोर्ट समिति ने विस्तृत जांच और जिम्मेदार लोगों की पहचान की मांग की।
अवैध रूप से खनन किए गए कोयले के लिए लंबित एफआईआर में तेजी लाने की सिफारिश।
डिजिटल डेस्क, शिलांग। मेघालय हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त समिति ने रिकार्ड में दर्ज 13.02 लाख टन से अधिक कोयले के 'गायब' होने के मामले में विस्तृत जांच और इसके लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बी.पी. काताके की अध्यक्षता वाली इस समिति ने अपनी 41वीं अंतरिम रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि डिप्टी कमिश्नर द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन के बाद भी कोयले की कमी पर कोई विवाद नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को इस ईंधन का संरक्षक माना है। समिति का कहना है कि इस भारी मात्रा में कोयले के 'गायब' होने के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन पर जिम्मेदारी तय करने के लिए गहन जांच जरूरी है।
तुलनात्मक रूप से, 25 टन प्रति ट्रक की क्षमता के हिसाब से यह मात्रा लगभग 52 हजार ट्रक लोड के बराबर है। यदि प्रतिदिन 100 ट्रक भी चले, तो इस पूरे कोयले को ढोने में लगभग 520 दिन यानी करीब डेढ़ साल का समय लगेगा।
इसके अलावा, समिति ने कोल इंडिया लिमिटेड के डिपो के बाहर अवैध रूप से खनन किए गए कोयले के 'गायब' होने का मुद्दा भी उठाया है। रिपोर्ट के अनुसार, 37,449.53 टन गायब कोयले में से शुरुआत में केवल 4,141.83 टन के लिए ही प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिससे 33,307.7 टन के मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई लंबित है। समिति ने इस शेष मात्रा के लिए तुरंत एफआइआर दर्ज करने और जांच में तेजी लाने की सिफारिश की है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
