आप लखनऊ के वाशिंदे हों या पक्के बनारसी, इंदौरी हों या फिर कानपुरी, या हों लुधियानवी, पटना में रहते हों या मेरठ में, या फिर रायपुर,देहरादून,या रांची में हो आपका घर। तो जान लीजिए, शहर को बेहतर बनाने का यह मौका आपके लिए ही है। 02 जुलाई से इन्हीं दस शहरों में शुरू हो रहा है 'माय सिटी माय प्राइड' अभियान। हिंदी और क्षेत्रीय भाषा - बोली से जुड़े भारत के ये दस शहर दरअसल भविष्य के विकास केंद्र हैं।

बनारस

बनारस शहर धर्म की नहीं बल्कि आध्यात्मिक नगरी है। यहां मृत्यु का शोक नहीं, जीवन की खुशी नहीं, बल्कि बसती है तो इन दोनों के बीच होने वाला आनंद। यह ढेरो रहस्यों को अपने अंदर समेटे हुए है, यह दिल में तो आता है पर समझ में नहीं आता। यहां पर ज्ञान की गंगा बहती रहती है। चाय चल रही है और पान की गिलौरियां धड़ाधड़ मुंह में गायब हो रही हैं। कहा भी जाता है, ‘बनारस में सब गुरु, केहू नाहीं चेला।’ इसलिए बनारस को कृपया उसकी टूटी सड़कों और गंदी गलियों से न देखें। हल्की फुल्की बातों में भी बनारस जीवन का मर्म बता देता है।

 

लखनऊ

लखनऊ महज एक शहर नहीं बल्कि मिजाज है। लखनऊ की हवाओं में स्नेह भरा आमंत्रण है। यहां की फिजा में संगीत की सुमधुर स्वर लहरियां सुनाई देती हैं। यह दुनिया के उन चुनिंदा शहरों में से एक है जो गोमती नदी के दोनों किनारों पर आबाद है। लखनऊ की शाम तो विश्व प्रसिद्ध है। हजरतगंज का एक चक्कर लगा लीजिए, चोला मस्त हो जाएगा। लखनऊ के नवाब जहां अपनी नजाकत, नफासत के साथ ही स्थापत्य के लिए जाने गए वहीं अंग्रेजों ने भी इल्म का परचम फहराने में पूरा जोर लगा दिया। बड़ा इमामबाड़ा, छोटा इमामबड़ा हो या चाहे भूलभुलैया या घंटाघर। नवाबी दौर की तमाम इमारतें अब भी तनकर खड़ी पर्यटकों को आमंत्रण देती दिखती हैं।

लुध‍ियाना

ये शहर वीरों की नगरी है। सरदार करतार सिंह, लाला लाजपत राय, मौलाना हबीब उर रहमान और बाबा संता सिंह ने इस शहर का मान बढ़ाया है। अंगरेजों के खिलाफ लड़ाई में भी इस शहर ने जबरदस्त योगदान दिया था। पंजाब की आर्थिक राजधानी के रूप में मशहूर लुधियाना को देश का मैनचेस्टर भी कहते हैं। भले ही शहर की आबादी लाखों में है, लेकिन यहां के होजरी, टेक्सटाइल, साइकिल इंडस्ट्री, हैंड टूल, मशीन टूल, ऑटो पार्ट्स, सिलाई मशीन इंडस्ट्री ने देश विदेश में करोड़ों लोगों के लिए रोजगार के दरवाजे हमेशा खुले रखे हैं। लुधियाना खाने-पीने के मामले में जन्नत है। यहां के लोग भी खाने-पीने के जबरदस्त शौकीन होते हैं।

कानपुर 

कानपुर यूपी के उन शहरों में से जिनको बिजनेस करने की समझ है। मां गंगा के किनारे पसरा ये शहर अपने उद्योगों के कारण एक अलग पहचान बनाए हुए है। इसलिए एक समय कानपुर को पूरब का मैनचेस्टर कहा जाता था। ये शहर मिजाज से बगावती है। 1857 की क्रांति में इस शहर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई यहां इंजीनियरिंग की दुनिया में मानक आईआईटी है जिसका यहां के लोगों को बड़ा नाज है। वैसे, आज के कानपुर का नाम पहले कान्हपुर हुआ करता था। यह शहर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मानचित्र पर मौजूद है। यहां के स्टेडियम ग्रीन पार्क में इंटरनेशनल मुकाबलों की कशमकश होती है।

देहरादून

हिमालय और शिवालिक पर्वत की गोद में बसा देहरादून आपको खूबसूरत नजारों के दर्शन कराता है। इसका ऐसा आकर्षण है कि अगर एक बार यहां आए जो ये आपके जेहन में एक खुशनुमा याद के रूप में बस जाता है। देहरादून जहां एक तरफ आधुनिकता की चादर ओढ़े हुए है वहीं विरासत को भी पूरी शान के साथ संजोये हुए है। यह जगह पर्यटन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। यह जगह स्कूली शिक्षा के लिए विख्यात है। यहां पर कई मशहूर बोर्डिंग स्कूल हैं, जिसमें कई नामी-गिरामी हस्तियां पढ़ी हैं। इसका इतिहास काफी प्राचीन है। यहां से महज 56 किलोमीटर दूर पर कालसी नाम की जगह है, जहां तीसरी सदी के शिलालेख मिले हैं।

इंदौर

मध्यप्रदेश की व्यवसायिक राजधानी है इंदौर। यहां आकर भारत के गौरवपूर्ण इतिहास को जीता-जागता महसूस कर सकते हैं। इंदौर शहर एक मिसाल है उस स्वर्णिम युग की जिसे होल्कर राजाओं ने अपने पराक्रम से सजाया-संवारा। इंदौर मध्य प्रदेश का व्यावसायिक हब है। मुंबई से करीब है और गुजरात से भी जुड़े होने के कारण आर्थिक रूप से ही सक्रिय नहीं बल्कि कई मायनों में अव्वल है। इंदौर इतिहास, सांस्कृतिक धरोह रें, बाजार और खानपान हर दृष्टि से खास है। यहां का लाल बाग महल देखने लायक है। इसे होल्कर नरेश तुकोजीराव ने बनवाया था। इसका विशाल गेट बकिंघम पैलेस के गेट की हूबहू कॉपी है।

मेरठ

मेरठ का जिक्र आते ही 1857 की क्रांति की याद ताजा हो जाती है। जब मेरठ की छावनी में मंगल पांडेय ने अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति का बिगुल बजाया था और उसके बाद इस जगह को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली थी। यह शहर पूरे देश में चीनी की मिठास घोलता है। इस पूरे इलाके में जबरदस्त गन्ना उत्पादन होता है। महाभारत काल में भी इस शहर का जिक्र है। दरअसल दुर्योधन ने पांडवों और उनकी मां कुंती को यहां के मारने की योजना बनाई थी लेकिन वे यहां से बचने में कामयाब हुए थे। यह किला आज भी मौजूद है। इस जगह पर नौचंडी का मेला लगता है जो कि हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है।

पटना

बिहार की राजधानी पटना राजनीति का केंद्र है। यहां हर नागरिक से आप राजनीति पर बतिया सकते हैं। यहां पर बोले जाने वाली भाषा भोजपुरी काफी प्यारी जुबान है। इस भाषा में शिष्टाचार की महक है और अंदाज खांटी देसी है। इस शहर का अंदाज बगावती है। अंगरेजों के खिलाफ इस शहर ने जोरदार लड़ाई लड़ी थी। नील की खेती के लिए 1917 में चम्पारण आन्दोलन तथा 1942 का भारत छोड़ो आन्दोलन के समय पटना की भूमिका जबरदस्त रह͊। इस शहर को देखकर लगता है कि मां गंगा ने अपने आंचल में पटना को पाल रखा है। यहां पर ही विश्व का सबसे लंबा सड़क पुल महात्मा गांधी सेतु है, जिसकी लंबाई 5575 मीटर है।

रायपुर

छत्तीसगढ़ के मध्य में बहती महानदी के प्रवाह की तरह लहलहाते रायपुर को धान का कटोरा कहा जाता है। साल 2000की सर्दियों में हिंदुस्तान के 26वें राज्य के रूप में आकार लेने वाले छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर है। पुराने भवन और किलों के आधार पर इतिहासकारों का दावा है कि रायपुर का अस्तित्व 9वीं सदी से है। लेकिन ज्यादातर लोगों का मानना है कि ये शहर 14वीं सदी में बसा था। मौजूदा रायपुर शहर से 24 किमी की दूरी पर सरकार एक नया रायपुर बसा रही है। साल 2014 में ही सरकारी मंत्रालय शिफ्ट किए गए हैं। यह एक बड़ी योजना का हिस्सा है।

रांची

 

झारखंड की राजधानी रांची पर प्रकृति ने अपने सौंदर्य को खुलकर लुटाया है। अनुपम प्रकृतिक खूबसूरती के बलबूते रांची विश्व के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहां के झरने बड़े विख्यात है इसलिए इसे झरनों का शहर भी कहा जाता है। इस शहर का पांच गाघ झरना सबसे मनमोहक है क्योंकि यह पांच धाराओं में गिरता है। इसके गोंडा हिल और रॉक गार्डन, मछली घर, बिरसा जैविक उद्यान, टैगोर हिल, मैकक्लुस्किगंज और आदिवासी संग्राहलय इसके प्रमुख पर्यटक स्थल हैं। यह झरने और पर्यटक स्थल मिलकर रांची को पर्यटन का स्वर्ग बनाते हैं और पर्यटक शानदार छुट्टियाँ बिताने के लिए हर वर्ष यहां आते हैं।

By Ashish Maharishi