नई दिल्ली, पीटीआइ। सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को तटीय क्षेत्रों में अवैध रूप से बहु-मंजिला इमारत बनाने की अनुमति देने के लिए फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा है कि वह इस तरह के निर्माणों में शामिल अधिकारियों पर जिम्मेदारी तय करेगा। कोर्ट, तटीय क्षेत्र के इलाकों में आने वाली अवैध इमारतों के निर्माण के बारे में जानकर स्तब्ध है। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह इस मुद्दे पर शुक्रवार को एक विस्तृत आदेश पारित करेगी।

आप प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं

पीठ ने राज्य के मुख्य सचिव से कहा, ' क्या आपको पता है बाढ़ और पर्यावरण की तबाही के कारण कितने लोग मारे गए हैं? आप प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। आपने पीड़ितों के लिए कितने घर बनाए हैं। अभी भी तटीय क्षेत्रों अवैध निर्माण जारी है।' कोर्ट ने मुख्य सचिव को प्रकृति को इससे होने वाली तबाही का आकलन करने के लिए एक सर्वेक्षण करने को कहा है।

शुक्रवार को एक विस्तृत आदेश 

मुख्य सचिव की इससे मुश्किल बढ़ सकती हैं। पीठ ने कहा, 'हमे पता है वहां क्या हो रहा है। हम इसमें जिम्मेदार लोगों पर जिम्मेदारी तय करेंगे। यह एक बड़ा नुकसान है। यह एक हाई टाइड क्षेत्र है और तटीय क्षेत्र में सैकड़ों अवैध इमारतों के निर्माण के मामले सामने आए हैं। मुख्य सचिव ने अपने हलफनामे में यह संकेत नहीं दिया है कि शीर्ष अदालत के आदेश का पालन करने के लिए कितना समय चाहिए। हम शुक्रवार को एक विस्तृत आदेश पारित करेंगे।' 

क्या है मामला

बता दें कि शीर्ष अदालत ने पहले राज्य सरकार से 20 सितंबर तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने से पहले कहा था कि 23 सितंबर को मुख्य सचिव को उसके समक्ष उपस्थित होना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने केरल के एर्नाकुलम जिले में स्थित पांच बड़ी रिहायशी इमारतों को गिराने का आदेश दिया है। इन इमारतों को लेकर आरोप है कि इनके निर्माण में तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) से जुड़े नियमों का उल्लंघन किया गया है। 

Posted By: Tanisk

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