ममता को मिला 'फुटबॉलर' का खिताब, लेकिन कैसे जीतेंगी TMC का 'खेला'? महाराष्ट्र ने दिखाया 'रेड कार्ड'
तृणमूल का नाम व चुनाव चिह्न फ्रीज करने पर भड़कीं ममता बनर्जी ने कहा कि यह लोकतंत्र के इतिहास का ...और पढ़ें

HighLights
चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के गुटों के लिए नए नाम और चुनाव चिह्न की घोषणा की
ममता बनर्जी गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबाल खिलाड़ी’ का चुनाव चिह्न दिया गया
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न (सिंबल) को फ्रीज करने के चुनाव आयोग के फैसले पर शुक्रवार को कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए तीखा हमला बोला। शाम में कालीघाट स्थित अपने आवास पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ममता ने इसे देश के लोकतांत्रिक इतिहास का काला दिन बताया।
ममता ने कहा कि वह इस फैसले को स्वीकार नहीं करेंगी और राजनीतिक, लोकतांत्रिक तथा कानूनी तरीके से लड़ाई जारी रखेंगी। चुनाव आयोग द्वारा उनके गुट को अंतरिम व्यवस्था के तहत ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और फुटबाल खिलाड़ी चुनाव चिह्न आवंटित किए जाने के बाद ममता ने कहा कि इससे उनकी मूल पार्टी की पहचान और जोड़ा घास फूल चिह्न पर उनका दावा समाप्त नहीं होता।
अंतरिम व्यवस्था को नहीं मानेंगी अंतिम समाधान
ममता ने कहा कि उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, नामांकन पूरा हो चुका था और प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न भी मिल चुके थे। ऐसे में अब आयोग के इतना बड़ा फैसला लेने के समय पर उन्होंने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से वैकल्पिक नाम और चिह्न देना केवल चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए था, इसे चुनाव आयोग के फैसले की स्वीकृति नहीं माना जाना चाहिए।
न मैं झुकुंगी और न आत्मसमर्पण करुंगी: ममता
ममता ने स्पष्ट कहा कि वह न झुकेंगी और न आत्मसमर्पण करेंगी तथा पार्टी की मूल पहचान हासिल करने के लिए लोकतांत्रिक और कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी। ममता ने कहा कि उन्होंने करीब 29 वर्षों के संघर्ष और राजनीतिक लड़ाई के जरिए पार्टी को खड़ा किया है। उन्होंने दावा किया कि जोड़ा फूल चिह्न पिछले 28 वर्षों से पार्टी की पहचान रहा है। ममता ने कहा कि उनके खेमे ने जमीनी स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक हुए संगठनात्मक चुनावों से संबंधित दस्तावेज चुनाव आयोग के समक्ष जमा किए हैं। उन्होंने प्रतिद्वंद्वी खेमे के संगठनात्मक दावों पर भी सवाल उठाया।
आईएनडीआईए गठबंधन को मजबूत करने संकल्प
चुनाव आयोग के इस फैसले और नंदीग्राम उपचुनाव के लिए पार्टी की प्रत्याशी संचिता प्रधान दे के अचानक नाम वापस लेने की घटनाक्रम के बीच ममता ने नंदीग्राम में कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने की घोषणा की। उनके खेमे की प्रत्याशी संचिता प्रधान दे ने दोपहर में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद अपना नामांकन वापस ले लिया। ममता ने कांग्रेस को तृणमूल की सिस्टर पार्टी बताते हुए कहा कि नंदीग्राम में समर्थन देने का उद्देश्य विपक्षी आईएनडीआईए गठबंधन को मजबूत करना है।
राजनीतिक लड़ाई में विपक्षी दलों का साथ
ममता ने यह भी बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने तृणमूल का नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज करने के घटनाक्रम के बाद फोन के जरिए उनसे संपर्क किया है। ममता ने कहा कि उनका खेमा राजनीतिक लड़ाई में विपक्षी दलों के साथ मिलकर आगे बढ़ेगा और सभी मिलकर लड़ेंगे।
चुनाव चिह्न पर सियासत
मालूम हो कि चुनाव आयोग ने शुक्रवार को ममता खेमे को ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और फुटबाल खिलाड़ी चिह्न तथा ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस और लिफाफा चिह्न आवंटित किया। आयोग ने एक दिन पहले दोनों खेमों के आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी।
भाजपा पर विपक्षी दलों को कमजोर करने का लगाया आरोप
ममता ने भाजपा पर विपक्षी दलों को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए महाराष्ट्र में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़े घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों और संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया तथा कहा कि संस्थाओं के राजनीतिक इस्तेमाल से लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों को लेकर संकट पैदा हुआ है।
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