लद्दाख की छठी अनुसूची की मांग के समर्थन में उतरे खरगे, लेह गोलीबारी में मारे गए चार लोगों के लिए मांगा न्याय
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लद्दाख के लोगों की संवैधानिक सुरक्षा और 'छठी अनुसूची' के दर्जे की मांग का समर्थन किया है।
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मल्लिकार्जुन खरगे ने किया लद्दाख के लोगों की छठी अनुसूची की मांग का समर्थन (फोटो-पीटीआई)
HighLights
खरगे ने लद्दाख की संवैधानिक सुरक्षा और छठी अनुसूची का समर्थन किया।
कांग्रेस लद्दाख की जमीन, रोजगार, पर्यावरण और संस्कृति की रक्षा में साथ।
एक साल पहले लेह में हुई घटना की न्यायिक जांच की मांग की।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लद्दाख के लोगों की सार्थक संवैधानिक सुरक्षा की मांग का समर्थन किया है। खरगे ने कहा कि कांग्रेस लद्दाख के लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है।
लद्दाख को लोगों की इस मांग में 'छठी अनुसूची' का दर्जा भी शामिल है, ताकि केंद्र शासित प्रदेश की जमीन, रोजगार के मौकों, नाजुक पर्यावरण, संस्कृति और पहचान की रक्षा की जा सके।
खरगे ने लद्दाख के लोगों की मांग का किया समर्थन
मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'एक साल पहले, लद्दाख के लोगों के लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों के लिए हो रहे आंदोलन के दौरान लेह में चार युवाओं को गोली मार दी गई थी। शहीद दिवस पर, हम उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं और उनके परिवारों के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़े हैं।'
कांग्रेस नेता ने एक साल पहले हुई घटना को लेकर लिखा, '24 सितंबर की दुखद घटनाओं की न्यायिक जांच से पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए, जवाबदेही तय होनी चाहिए और बिना किसी डर या पक्षपात के न्याय मिलना चाहिए। लद्दाख के लोगों ने अपनी जायज मांगों को पूरा करने के लिए काफी लंबा इंतजार किया है।'
लद्दाख के लोगों की छठी अनुसूची की मांग पर खरगे ने लिखा, 'कांग्रेस पार्टी लद्दाख की जमीन, रोजगार, नाजुक पर्यावरण, संस्कृति और पहचान की रक्षा के लिए 'छठी अनुसूची' (Sixth Schedule) समेत सार्थक संवैधानिक सुरक्षा उपायों की उनकी मांग के साथ मजबूती से खड़ी है।'
खरगे ने आगे लिखा, 'लोकतंत्र और प्रतिनिधि संस्थाओं को पूरी तरह से बहाल किया जाना चाहिए और लद्दाख के लोगों को अपना भविष्य तय करने में अपनी प्रभावी बात रखने का अधिकार मिलना चाहिए।'
इस बीच, लद्दाख प्रशासन ने मंगलवार को अनुच्छेद 371 के तहत एक नए ढांचे का वादा किया, ताकि केंद्र शासित प्रदेश की खास जरूरतों के हिसाब से संवैधानिक सुरक्षा दी जा सके।
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