विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अन्ना हजारे की धमकी के बाद पीछे हटी महाराष्ट्र सरकार, नए आरटीआई नियमों पर रोक लगाने का दिया आदेश

Published: Fri, 03 Jul 2026 06:07 AM (IST)Updated: Fri, 03 Jul 2026 06:57 AM (IST)

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी के बाद महाराष्ट्र सरकार ने नए सूचना का अधिकार (आरटीआइ) ...और पढ़ें

अन्ना हजारे की धमकी के बाद पीछे हटी महाराष्ट्र सरकार (फोटो- एक्स)

अन्ना हजारे की धमकी के बाद पीछे हटी महाराष्ट्र सरकार (फोटो- एक्स)

HighLights

  1. सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने दी थी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी

  2. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि संशोधित आरटीआई नियम लागू न किया जाए

पीटीआई, मुंबई। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी के बाद महाराष्ट्र सरकार ने नए सूचना का अधिकार (आरटीआइ) नियमों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश दिया है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि हाल ही में अधिसूचित संशोधित आरटीआइ नियमों को फिलहाल लागू न किया जाए।

इन प्रस्तावित बदलावों में आरटीआई आवेदन शुल्क बढ़ाने, पहचान प्रमाण अनिवार्य करने और प्रत्येक आवेदन में केवल एक ही विषय से संबंधित जानकारी मांगने जैसी शर्तें शामिल थीं, जिन पर व्यापक विरोध हुआ था।

मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र राज्य सूचना आयोग को पत्र लिखकर कहा कि बिना अन्ना हजारे से विस्तृत चर्चा किए इन संशोधनों को लागू करना उचित नहीं होगा। इसके बाद राज्य सूचना आयोग ने भी संशोधित नियमों पर रोक लगाने का निर्णय लिया।

इससे पहले मुख्य सूचना आयुक्त ने अहमदनगर जिले के रालेगण सिद्धि जाकर अन्ना हजारे से मुलाकात की थी और उन्हें प्रस्तावित बदलावों पर चर्चा के लिए मनाने की कोशिश की थी, लेकिन अन्ना हजारे अपने रुख पर अड़े रहे।

उन्होंने कहा कि ये संशोधन सूचना के अधिकार कानून की मूल भावना को कमजोर करते हैं और आम नागरिकों के लिए सूचना प्राप्त करना कठिन बना देंगे।

अन्ना हजारे ने चेतावनी दी थी कि यदि ‘महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026’ को वापस नहीं लिया गया, तो वे पांच जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे। सरकार के फैसले को फिलहाल विरोध शांत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

महाराष्ट्र में महिला किसानों को मान्यता देने वाला अपनी तरह का पहला बिल पास

 

महाराष्ट्र विधानसभा ने गुरुवार को सर्वसम्मति से एक बिल पास किया। इसका उद्देश्य महिला किसानों को मान्यता देना, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं, संस्थागत लोन, खेती से जुड़ी सेवाओं और महिला किसान पहचान-पत्रों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक ढांचा तैयार करना है।

महिला किसान सशक्तीकरण बिल देश में इस तरह का पहला प्रस्तावित कानून है। इसका मकसद खेती में महिलाओं के योगदान को मान्यता देना है। इसके लिए खेती से जुड़ी महिलाओं की मदद के लिए एक खास फंड बनाया जाएगा और अकेले खेती करने वाली महिलाओं को विशेष सहायता दी जाएगी।

कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने कहा कि बिल में बताया गया है कि बुवाई से लेकर कटाई तक पुरुषों के साथ काम करने और डेरी फार्मिंग व पशुपालन जैसी सहायक गतिविधियों में शामिल होने के बावजूद महिलाएं ज्यादातर संस्थागत लाभों से वंचित रही हैं, क्योंकि खेती की जमीन आमतौर पर परिवार के पुरुष सदस्यों के नाम पर होती है।