3200 पैनल और सहयोगी कंपनिया...सौरभ चंद्राकर ने कैसे फैलाया महादेव सट्टा एप का नेटवर्क?
सौरभ चंद्राकर ने महादेव सट्टा ऐप और सहयोगी प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से तीन वर्षों में 94,000 करोड़ रुपये का विशाल सट्टा नेटवर्क फैलाया।

सौरभ ने सहयोगी कंपनियों के जरिये फैलाया था महादेव सट्टा एप का नेटवर्क।
HighLights
सौरभ चंद्राकर ने 94,000 करोड़ का सट्टा नेटवर्क फैलाया।
महादेव सट्टा ऐप का कारोबार दुबई से नियंत्रित होता था।
सीबीआई को दिल्ली कोर्ट से दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मिली।
नीलू रंजन, नई दिल्ली। महादेव सट्टा एप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर ने सहयोगी कंपनियों और 3200 पैनल के सहारे तीन वर्ष के अंदर 94 हजार करोड़ का चूना लगाने में सफल रहा। 2019 तक भिलाई के जूस की दुकान पर 15 हजार रुपये की नौकरी करने वाला सौरभ चंद्राकर महादेव सट्टा एप का सट्टा चलाने वाला पैनल 15-20 लाख रुपये में देता था। उन पैनल से होने वाली कमाई का 70-80 प्रतिशत हर हफ्ते महादेव सट्टा एप के खाते में आता था।
सारा कारोबार दुबई स्थित मुख्यालय से नियंत्रित किया जाता था, जहां भिलाई और उसके आसपास के युवा बड़ी संख्या में काम करते थे। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) 2022 से महादेव सट्टा एप से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है।
ईडी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, महादेव सट्टा एप के पैनल भिलाई और दुबई के साथ-साथ पूरे देश में फैले हुए थे और इन पर हर दिन करोड़ों रुपये का कलेक्शन आता था। इन्हें संभालने के लिए बड़ी संख्या में बैंक अकाउंट खोले गए थे, जिनमें ये पैसे घुमाए जाते थे और उसके बाद हवाला के मार्फत दुबई भेज दिए जाते थे।
इन बैंक अकाउंट्स को रखने वालों को छोटा हिस्सा कमीशन के रूप में दिया जाता था। लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे भी बैंक अकाउंट मिले हैं, जिन्हें फर्जी तरीके से केवाईसी दस्तावेज जुटाकर खोला गया था। 2023 में महादेव सट्टा एप और उसके प्रमोटरों पर शिकंजा कसने के बाद भी उसके द्वारा बांटे गए पैनलों पर सट्टे का कारोबार चलता रहा, जिन्हें एजेंसियां धीरे-धीरे ढूंढकर बंद करा रही हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पैनल का पूरा सिस्टम फ्रेंचाइजी तरीके से काम करता था, इसीलिए उन्हें ढूंढने में दिक्कत आ रही है। महादेव सट्टा एप के कुबेर का खजाना साबित होने के बाद सौरभ चंद्राकर यहीं नहीं रुका। बल्कि उसने रेड्डी, अन्ना, फेयरप्ले जैसे सहयोगी प्लेटफॉर्म भी खड़े कर लिए थे।
ईडी के आकलन के अनुसार, सिर्फ महादेव सट्टा एप और उसके पैनल के माध्यम से चंद्राकर ने 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक जुटाए थे। इसके अलावा स्काईएक्सचेंज के माध्यम से 12 हजार करोड़ और लोटस365 के माध्यम से 2400 करोड़ रुपये जुटाए थे।
दिल्ली के कोर्ट ने दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दी
सौरभ चंद्राकर को अदालत से झटका लगा है। राउज एवेन्यू स्थित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश निखिल चोपड़ा ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) को उसकी दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दे दी। जांच एजेंसी अब उसे रायपुर की विशेष अदालत में पेश करेगी।
सुनवाई के दौरान चंद्राकर के अधिवक्ता ने सीबीआई की मांग का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि उनके मुवक्किल का ओमान से प्रत्यर्पण प्रिवेंशन आफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के मामले में हुआ है, सीबीआई के मामले में नहीं। इसलिए ट्रांजिट रिमांड की मांग उचित नहीं है।
अदालत ने यह दलील खारिज कर एजेंसी की मांग स्वीकार कर ली। ईडी ने अदालत को बताया कि चंद्राकर के विरुद्ध मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गैर-जमानती वारंट जारी है और वह उसे गिरफ्तार करना चाहती है। सीबीआई ने रविवार को ओमान से चंद्राकर का प्रत्यर्पण कराया था। वह सीबीआई के दो और ईडी के एक मामले में वांछित है। तीनों मामलों में आरोप-पत्र दाखिल किए जा चुके हैं।
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