बिना अनुमति धर्म प्रचार पर ओसीआइ कार्ड रहेगा रद, मद्रास हाईकोर्ट ने बरकरार रखा आदेश
मद्रास हाईकोर्ट ने भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक जॉन डेनियल का ओसीआई कार्ड रद्द करने के विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी के फैसले को बरकरार रखा है।

ओसीआई कार्ड रद्द करने का फैसला बरकरार रखा।
HighLights
मद्रास हाईकोर्ट ने ओसीआई कार्ड रद्द करने का फैसला बरकरार रखा।
भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक पर धर्म प्रचार का आरोप था।
बिना अनुमति धर्म प्रचार को कोर्ट ने गलत ठहराया।
डिजिटल डेस्क, चेन्नई। मद्रास हाईकोर्ट ने भारतीय मूल के एक अमेरिकी नागरिक का प्रवासी भारतीय नागरिक (ओसीआई) पंजीकरण कार्ड विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी की ओर से रद किए जाने के फैसले को बरकरार रखा है। इस अमेरिकी नागरिक पर केंद्र सरकार से अनुमति लिए बिना धर्म प्रचार की गतिविधियां करने का आरोप था।
जस्टिस डी.भारथा चक्रवर्ती ने जान डेनियल की याचिका खारिज कर दी। याचिका में अधिकारियों को उनका ओसीआइ पंजीकरण बहाल करने और उससे जुड़े विशेषाधिकारों का लाभ लेने की अनुमति देने का निर्देश देने की मांग भी की गई थी।
न्यायाधीश ने कहा, 'हालांकि, याचिकाकर्ता अपनी मां से मिलने के लिए नियमित वीजा के लिए आवेदन करने को स्वतंत्र है। सभाएं करने और धार्मिक उद्देश्यों के लिए वह भारत में अपनी गतिविधियां तभी कर सकता है, जब उसे जरूरी अनुमति मिल जाए।'
सुनवाई के दौरान जान डेनियल ने अदालत से कहा कि उन्होंने ओसीआई कार्डधारकों पर लागू किसी कानून का उल्लंघन नहीं किया है। उन्होंने धर्म प्रचार की गतिविधियों और मतांतरण के आरोपों से इनकार किया गया।
उपदेश व ईश्वर का संदेश देना धर्म प्रचार के दायरे में
न्यायाधीश ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता उपदेश देते हैं और ‘ईश्वर’ का संदेश फैलाने की गतिविधियां करते हैं, तो ये गतिविधियां धर्म प्रचार के दायरे में आएंगी। इसलिए उन्हें इसके लिए विशेष अनुमति लेनी चाहिए थी। उन्होंने ऐसी अनुमति नहीं ली।
याचिकाकर्ता पर लगे आरोपों की प्रकृति को देखते हुए उनका पंजीकरण रद करना उचित है। याचिकाकर्ता के माता-पिता भारतीय मूल के थे और अमेरिका में जन्म लेने के कारण उन्हें अमेरिकी नागरिक माना गया। इसी आधार पर याचिकाकर्ता को पंजीकरण देना उचित था।
धर्म प्रचार नहीं करने का दावा-पहली नजर में झूठ
न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ता ने इस अदालत के सामने स्पष्ट और व्यापक बयान दिया था कि वह कभी भी धर्म प्रचार की किसी गतिविधि में शामिल नहीं रहे और भारत केवल अपनी मां, परिवार तथा दोस्तों से मिलने आए थे, ‘जो पहली नजर में झूठ है।’
न्यायाधीश ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत मिलने वाली राहत न्यायसंगत आधार पर दी जाती है और याचिकाकर्ता के स्पष्ट इन्कार व अदालत के सामने रखी गई सामग्री को देखते हुए ऐसी राहत नहीं दी जा सकती।
सोर्स-न्यूज एजेंसी PTI के इनपुट के अनुसार
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