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मधुमिता शुक्ला हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने दी दोषी रोहित चतुर्वेदी की समय पूर्व रिहाई की अनुमति

Published: Fri, 15 May 2026 10:30 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के दोषी रोहित चतुर्वेदी की समय पूर्व रिहाई की याचिका को मंजूरी दे दी है।

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HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के दोषी को रिहा किया।

  2. अदालत ने कहा, सुधार पर हो सरकार का ध्यान।

  3. रोहित चतुर्वेदी ने जेल में 22 वर्ष बिना छूट बिताए थे।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कवयित्री मधुमिता शुक्ला की 2003 में हत्या के दोषियों में से एक को समय से पहले रिहा करने की मांग वाली याचिका को शुक्रवार को मंजूरी दे दी। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि अपराध की प्रकृति माफी से इन्कार करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती। साथ ही कहा कि सरकार का ध्यान सुधार पर होना चाहिए, न कि सजा देने पर।

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने गृह मंत्रालय के नौ जुलाई, 2025 के उस आदेश को रद कर दिया, जिसमें उत्तराखंड सरकार की दोषी रोहित चतुर्वेदी को समय से पहले रिहा करने की सिफारिश को खारिज कर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि रोहित चतुर्वेदी ने बिना किसी छूट के जेल में 22 वर्ष बिताए हैं।

वह पहले से जमानत पर बाहर है और उसे आत्मसमर्पण करने की जरूरत नहीं है। पीठ ने कहा कि कानून के शासन से संचालित संवैधानिक व्यवस्था में सजा में छूट से इन्कार केवल अपराध की जघन्यता के आधार पर नहीं किया जा सकता। सजा में छूट सजा सुनाने की प्रक्रिया का विस्तार नहीं है, बल्कि यह एक अलग कार्य है जो वर्तमान और भविष्य से जुड़ा है।

यानी कैदी का आचरण, सुधार के सुबूत और समाज में फिर से घुलने-मिलने की संभावनाएं। एक उदार संवैधानिक व्यवस्था में सजा और उससे जुड़ी सभी बातें, जिसमें सजा में छूट भी शामिल है, तर्क के आधार पर उचित ठहराई जानी चाहिए, न कि आक्रोश के आधार पर।

गौरतलब है कि मधुमिता की नौ मई, 2003 को लखनऊ में हत्या कर दी गई थी, उस समय वह गर्भवती थीं। इस हत्याकांड में उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी को सितंबर, 2003 में गिरफ्तार किया गया था। दोनों के बीच प्रेम संबंध थे।

24 अक्टूबर, 2007 को उत्तराखंड की निचली अदालत ने अमरमणि त्रिपाठी, उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी, उनके भतीजे रोहित चतुर्वेदी और उनके सहयोगी संतोष कुमार राय हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। 16 जुलाई, 2012 को उत्तराखंड हाई कोर्ट और 19 नवंबर, 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने इसे बरकरार रखा था। अमरमणि व मधुमणि को 24 अगस्त, 2023 को समयपूर्व रिहा कर दिया गया था।

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