लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स पर बड़ा अपडेट; पूरी छूट मिलना मुश्किल, बजट में आंशिक राहत के संकेत
शेयर बाजार से विदेशी निवेश की बिकवाली के बीच बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) टैक्स हटाने पर चर्चा है।

एलटीसीजी टैक्स पूरी तरह खत्म करना सरकार के लिए मुश्किल।
HighLights
एलटीसीजी टैक्स पूरी तरह खत्म करना सरकार के लिए मुश्किल।
बजट में एलटीसीजी दर में 2-2.5% कटौती संभव है।
विदेशी निवेश वापसी की गारंटी नहीं, वैश्विक हालात महत्वपूर्ण।
राजीव कुमार, नई दिल्ली। शेयर बाजार से विदेशी संस्थागत निवेश की लगातार बिकवाली के बाद इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि बजट में लांग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) टैक्स को समाप्त कर दिया जाता है तो इससे फिर से विदेशी संस्थागत निवेश (एआईआई) बढ़ जाएंगे।
कई औद्योगिक संगठनों के साथ एसबीआइ समूह की तरफ से भी इस बात की सिफारिश हो रही है। हाल ही में एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने एलटीसीजी टैक्स को लेकर सिर्फ इतना कहा था कि हम इस पर चर्चा के लिए तैयार है। उसके बाद अगले दिन सेंसेक्स चढ़ गया। इसके बाद यह धारणा और मजबूत हो गई कि एलटीसीजी टैक्स समाप्त करने देने पर बाजार मजबूत हो जाएगा।
लेकिन सूत्र व आर्थिक जानकारों का कहना है कि पूरी तरह से एलटीसीजी टैक्स को सरकार नहीं हटा सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि वित्त वर्ष 2024 में सरकार को एलटीसीजी से 72,249 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था और वित्त वर्ष 2025 में यह बढ़कर 1.29 लाख करोड़ हो गया।
हालांकि सरकार की तरफ से वित्त वर्ष 2026 में एलटीसीजी से होने वाली राजस्व प्राप्ति के आंकड़ों का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि यह भी एक लाख करोड़ के पास होगा।
ऐसे में इतनी बड़ी राशि को सरकार गंवाना नहीं चाहेगी क्योंकि कच्चे तले की लगातार बढ़ती कीमत और खाद सब्सिडी के बढ़ने से सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है।
चालू वित्त वर्ष में खाद सब्सिडी तीन लाख करोड़ तक जा सकता है जबकि बजट में इस मद में 1.70 लाख करोड़ का प्रविधान किया गया था। जानकार यह भी कह रहे हैं कि सभी देशों की आर्थिक हालत अलग-अलग होती है और उसके मुताबिक उनका कर ढांचा तैयार किया जाता है।
सूत्रों का कहना है कि बजट में एलटीसीजी टैक्स की 12.5 प्रतिशत की दर में 2-2.5 प्रतिशत तक की कटौती की जा सकती है, लेकिन इसे पूरी तरह से समाप्त करना मुश्किल दिख रहा है। बाजार के जानकारों का कहना है कि इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि एलटीसीजी टैक्स को समाप्त कर देने पर एफआईआई फिर से वापस आ जाएंगे।
निवेशक हमेशा प्रोफिट बुकिंग देखता है। अगर उन्हें प्रोफिट दिखेगा तो वे एलटीसीजी के जारी रहने पर भी बाजार में निवेश करेंगे। उन्हें लाभ होता रहेगा तो उन्हें एलटीसीजी से कोई फर्क नहीं पड़ता है।
अभी जो वैश्विक हालात है, खासकर फेडरल रेट बढ़ रहा है, कच्चे तेल की कीमत लगातार बढ़ रही है और अमेरिकी बांड में पहले की तुलना में अधिक रिटर्न मिल रहा है।
ऐसे में, एफआईआई का भारतीय बाजार में एलटीसीजी के समाप्त कर देने पर तुरंत लौटना संभव नहीं दिख रहा है। इस साल भारतीय बाजार से तीन लाख करोड़ से अधिक एफआईआई की निकासी हो चुकी है।
शेयर बाजार में निवेश पर एक साल के बाद उसकी बिक्री से कमाई होती है तो उस पर एलटीसीजी टैक्स देना पड़ता है। 1.25 लाख तक के मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं लगता है जबकि उससे अधिक का मुनाफा होने पर 12.5 प्रतिशत का टैक्स देना पड़ता है।
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