बेरोजगारी-महंगाई, किसान और भारत-US ट्रेड डील... लोकसभा में बजट पर चर्चा, सरकार की नीतियों पर विपक्ष ने उठाए तीखे सवाल
लोकसभा में बजट पर गतिरोध समाप्त होने के बाद चर्चा शुरू हुई। विपक्ष ने बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की स्थिति और ...और पढ़ें

थरूर ने ट्रेड डील को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए और कहा कि समझौता भारत को दीर्घकालिक घाटे की ओर धकेल सकता है।
HighLights
लोकसभा में बजट पर पक्ष-विपक्ष के बीच गतिरोध टूटा।
विपक्ष ने बेरोजगारी, महंगाई, किसान मुद्दों पर सरकार को घेरा।
भाजपा ने बजट को 2047 तक विकसित भारत का मार्ग बताया।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कई दिनों के हंगामे और बार-बार के स्थगन के बाद आखिरकार मंगलवार को लोकसभा में पक्ष-विपक्ष के बीच गतिरोध टूटा और बजट पर विमर्श शुरू हो गया। दो बार के स्थगन के बाद जब कार्यवाही दोपहर दो बजे शुरू हुई तो साफ हो गया कि चर्चा केवल बजट के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की स्थिति और अमेरिका से व्यापारिक समझौते जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी तीखी टकराहट देखेगी।
चालू सत्र के प्रारंभ से ही दोनों पक्षों में टकराव जारी था, जिसके चलते राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर भी विमर्श नहीं हो पाया था। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने चर्चा की शुरुआत करते हुए बजट को आम आदमी से कटा हुआ बताया। कहा कि इसमें बेरोजगारी, बढ़ती असमानता और रहन-सहन की बढ़ती लागत को नजरअंदाज किया गया है।
'सरकार को किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ानी चाहिए'
कांग्रेस सांसद ने व्यंग्यात्मक अंदाज में गालिब के शेर का हवाला देते हुए सरकार पर कटाक्ष किया और कहा कि यह बजट लोगों को केवल सुरक्षित होने का भ्रम देता है, ठीक वैसे ही जैसे कार में एयरबैग को इधर-उधर कर दिया जाए। थरूर ने यह भी कहा कि किसानों की आय दोगुनी होने का वादा अबतक पूरा नहीं हुआ है और सरकार को किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ानी चाहिए।
थरूर ने ट्रेड डील को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए और कहा कि समझौता भारत को दीर्घकालिक घाटे की ओर धकेल सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका जब भारतीय निर्यात पर अब भी ऊंचे शुल्क लगा रहा है तब भारत द्वारा बड़े पैमाने पर अमेरिकी उत्पादों की खरीद का वादा करना न तो संतुलित है और न ही रणनीतिक।
'बजट के कई अनुमान इन्हीं दायित्वों पर निर्भर करते हैं'
शशि थरूर ने विदेश मंत्री और वाणिज्य मंत्री पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाते हुए कहा कि संसद को समझौते के दायित्वों की पूरी जानकारी नहीं दी गई है, जबकि बजट के कई अनुमान इन्हीं दायित्वों पर निर्भर करते हैं। विपक्ष की आलोचनाओं के जवाब में भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने बजट का जोरदार बचाव किया। उन्होंने इसे 2047 तक विकसित भारत बनाने की दिशा में ऐतिहासिक और निर्णायक कदम बताया।
उन्होंने कहा कि यह बजट सरकार की निरंतरता, संकल्प और जन-केंद्रित सोच को दर्शाता है और भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद गंतव्य के रूप में स्थापित कर रहा है।समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने समझौते को लेकर सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह 'डील' नहीं 'ढील' है और इससे किसानों व घरेलू उद्योगों को नुकसान पहुंचेगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ऐसा ही समझौता करना था तो 11 महीने का इंतजार क्यों कराया गया। उन्होंने बजट को दिशाहीन बताते हुए कहा कि इसमें किसानों, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के लिए ठोस प्रावधान नहीं दिखते।तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी ने सरकार पर करों के बोझ को लेकर निशाना साधा और कहा कि मौजूदा व्यवस्था में जन्म से लेकर अंतिम संस्कार तक हर चीज पर टैक्स देना पड़ रहा है। उन्होंने राजनीतिक संदर्भ में बंगाल का मुद्दा भी उठाया और भाजपा पर लगातार चुनावी हार का आरोप लगाया।
