नई दिल्ली, प्रेट्र। तिब्बत की निर्वासित सरकार के मुखिया लोबसांग सांगेय ने सोमवार को कहा कि चीन के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भारत को तिब्बत का मुद्दा भी उठाना चाहिए।

सांगेय ने फॉरेन कॉरेसपोंडेंस क्लब की तरफ से आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि भारत व चीन के बीच तनाव का एक मुद्दा तिब्बत भी है। तिब्बत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत व चीन के बीच बफर जोन का काम करता था, लेकिन चीन द्वारा तिब्बत को हथिया लिए जाने के बाद यह व्यवस्था खत्म हो गई।

सेंट्रल तिब्बत एडमिनिस्ट्रेशन (सीटीए) के प्रेसिडेंट ने कहा कि पंचशील समझौते के रूप में चीन ने विश्वासघात का बीज बोया था। चीन द्वारा तिब्बत पर कब्जा किए जाने के बाद भारत ने बड़ी कीमत चुकाई है। उन्होंने कहा, 'भारत को कहना चाहिए कि तिब्बत अहम मुद्दा है। उसे तिब्बत मुद्दे को सुलझाने में अहम भूमिका निभानी चाहिए।'

एलएसी में तनाव कम करने को लेकर अब भारत-चीन के बीच हर हफ्ते होगी बात

वहीं, दूसरी ओर पूर्वी लद्दाख के गलवन घाटी में चीन के साथ तनाव बढ़ा हुआ है। दोनों ही देशों ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी वास्‍तविक नियंत्रण रेखा के पास सैनिकों की तैनाती कर दी है। अब दोनों देशों के बीच बातचीत से विवाद सुलझाने पर सहमति बनी है। सूत्रों का कहना है कि एलएसी पर तनाव कम करने को लेकर तरीके खोजने के लिए अब भारत और चीन के बीच हर हफ्ते वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोर्डिनेशन (Working Mechanism for Consultation and Coordination, WMCC) स्‍तर की बातचीत होगी। यह बैठक वर्चुअल होगी जिसमें भारतीय पक्ष से विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय और सुरक्षा बलों समेत कई मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

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Posted By: Dhyanendra Singh

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