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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 20, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

UPSC में नहीं होगी सीधी भर्ती! लेटरल एंट्री विज्ञापन पर मोदी सरकार ने लगाई रोक

By Agency Edited By: Piyush Kumar
Published: Tue, 20 Aug 2024 01:44 PM (IST)Updated: Tue, 20 Aug 2024 02:24 PM (IST)

केंद्र में रिक्त संयुक्त सचिव निदेशक व उपसचिव के 45 पदों पर सीधी भर्ती (Lateral Entry) के विज्ञापन पर रोक ...और पढ़ें

लेटरल एंट्री के विज्ञापन पर केंद्र सरकार ने रोक लगा दी है।(फोटो सोर्स: जागरण)
लेटरल एंट्री के विज्ञापन पर केंद्र सरकार ने रोक लगा दी है।(फोटो सोर्स: जागरण)

एएनआई, नई दिल्ली। Lateral Entry। केंद्र सरकार ने लेटरल एंट्री के विज्ञापन पर रोक लगा दी है। इस मामले को लेकर कार्मिक मंत्री ने यूपीएससी (UPSC) चेयरमैन को पत्र लिखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर सीधी भर्ती के विज्ञापन पर रोक लगा दी गई है।

सरकार के फैसले पर मचा सियासी बवाल 

बता दें कि यूपीएससी ने 17 अगस्त को एक विज्ञापन जारी करते हुए 45 ज्वाइंट सेक्रेटरी, डिप्टी सेक्रेटरी और डायरेक्टर लेवल की भर्तियां निकाली थी। सरकार के इस फैसले पर जमकर सियासी बवाल मचा। कांग्रेस समेत ज्यादातर विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षण पर चोट कर रही है। इतना ही नहीं एनडीए के घटक दलों ने भी फैसले की आलोचना की।

सरकार ने क्यों वापस लिया फैसला? 

केंद्रीय कार्मिक मंत्री जितेंद्र सिंह ने यूपीएससी चेयरमैन को लिखे पत्र में बताया कि सरकार ने यह फैसला लेटरल एंट्री के व्यापक पुनर्मूल्यांकन के तहत लिया है। पत्र में कहा गया है कि ज्यादातर लेटरल एंट्री 2014 से पहले की थी। 2014 से पहले होने वाले लेटरल एंट्री में आरक्षण के बारे में कभी सोचा नहीं गया। नेशनल एडवाइजरी काउंसि पीएमओ को कंट्रोल करती थी।

वहीं, मोदी सरकार का मानना है कि सार्वजनिक नौकरियों में आरक्षण के साथ छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।

पत्र में आगे लिखा गया कि ये पद विशेष हैं ऐसे में इन पदों पर नियुक्तियों को लेकर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। इसकी समीक्षा और जरूरत के अनुरूप इनमें सुधार की जरूरत है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी का पूरा फोकस सामाजिक न्याय की ओर है।

केंद्रीय मंत्री ने लेटरल एंट्री पर क्या कहा था?

सरकार के इस फैसले पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था  कि एनडीए सरकार ने लेटरल एंट्री को लागू करने के लिए एक पारदर्शी तरीका बनाया है। यूपीएससी के माध्यम से पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से भर्तियां की जाएंगी। इस सुधार से प्रशासन में सुधार होगा।

भाजपा ने  कहा था कि लेटर एंट्री का प्रस्ताव कांग्रेस शासन में लाया गया था। वहीं, मनमोहन सिंह, मोंटेक सिंह अहलूवालिया, सैम पित्रोदा सरीखे लोगों को लेटरल एंट्री के जरिए ही कांग्रेस शासन में सरकार का हिस्सा बनाया गया था। 

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