'किरायेदार ने किया पर्यावरण का उल्लंघन तो मकान मालिक जिम्मेदार नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने किया NGT के आदेश का समर्थन
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें कहा गया था कि किरायेदार के पर्यावरणीय उल्लंघनों के लिए मकान मालिक जिम्मेदार नहीं होगा।
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सुप्रीम कोर्ट का आदेश (फोटो-पीटीआई)
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी के आदेश को सही ठहराया।
किरायेदार के पर्यावरणीय उल्लंघनों के लिए मकान मालिक जिम्मेदार नहीं।
गुजरात प्रदूषण बोर्ड की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि एक मकान मालिक अपने किरायेदार की रासायनिक इकाई द्वारा किए गए पर्यावरण उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार नहीं हो सकता।
जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने 14 नवंबर, 2025 के एनजीटी के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीपीसीबी) द्वारा दायर एक याचिका की सुनवाई कर रहा था, जिसमें एनजीटी के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसने सूरत के एक मकान मालिक को पर्यावरण उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार ठहराने वाले आदेश को रद कर दिया था।
एनजीटी ने कहा कि मालिक जगमोहन लाचीराम जालान को अपने किराए के परिसर में चल रही औद्योगिक इकाई द्वारा किए गए अपराधों के लिए 25 लाख रुपये का अंतरिम पर्यावरण क्षति मुआवजा नहीं देना पड़ेगा।
क्या है मामला?
यह मामला 16 अक्टूबर, 2021 को जीपीसीबी द्वारा एक कंपनी के खिलाफ जारी कामकाज बंद करने के आदेश के बाद शुरू हुआ था, जो बिना अनिवार्य अनुमति के डाई-इंटरमीडिएट बनाने का काम कर रही थी।
जांच दल ने पाया कि इकाई के अपशिष्ट नमूने सीमाओं से अधिक थे, जिसके कारण प्रदूषण बोर्ड ने 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। जालान ने तर्क किया कि उसने 2020 में एक निजी कंपनी के निदेशक को परिसर किराए पर दिया था और उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि यह एक बिना लाइसेंस वाली इकाई है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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