SHG से बदल रही गांव की तस्वीर: 93 लाख समूहों से जुड़ीं 10 करोड़ महिलाएं, 3.5 करोड़ बनीं लखपति दीदी
स्व-सहायता समूह (SHG) गांवों में महिलाओं की आर्थिक स्थिति बदल रहे हैं, जहाँ 93 लाख समूहों से जुड़ी 10 करोड़ ...और पढ़ें

छोटी बचत से आत्मनिर्भरता की राह पर साढ़े तीन करोड़ महिलाएं।
HighLights
3.5 करोड़ महिलाएं बनीं लखपति दीदी।
93 लाख SHG से जुड़ी 10 करोड़ महिलाएं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी।
अरविंद शर्मा, नई दिल्ली। गांवों में महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलने में स्व-सहायता समूह (एसएचजी) की बड़ी भूमिका है। कभी छोटी बचत के लिए बनाए गए ये समूह अब गांवों में उद्यमिता और रोजगार के नए केंद्र बनते जा रहे हैं। देश के करीब 93 लाख स्वयं सहायता समूहों से दस करोड़ से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इनमें 3.5 करोड़ अब लखपति बन चुकी हैं।
यानी इनके परिवार की वार्षिक आय एक लाख रुपये या इससे अधिक हो गई है। इस संख्या को बढ़ाकर छह करोड़ करना है। इसके लिए महिलाओं को सिर्फ बैंक ऋण उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें सफल उद्यमी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार ने तय की लखपति दीदी की परिभाषा
सरकार ने लखपति दीदी की परिभाषा भी तय की है। इसका मतलब किसी महिला के खाते में एक लाख रुपये होना भर नहीं है, बल्कि स्व-सहायता समूह से जुड़ी जिस महिला के परिवार की सालाना आय कम से कम एक लाख रुपये हो और यह आय लगातार कम से कम चार कृषि मौसम या चार कारोबारी चक्रों तक बनी रहेगी तो उसे लखपति दीदी माना जाएगा। इसके लिए परिवार की औसत मासिक आय कम से कम 10 हजार रुपये भी होनी चाहिए।
इन समूहों को बैंकों के जरिए अभी तक 13.67 लाख करोड़ रुपये ऋण दिया जा चुका है, जो महिलाओं के प्रति बैंकिंग व्यवस्था के बढ़ते भरोसे का उदाहरण है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार इन्होंने बैंकिंग व्यवस्था में भी साख बनाई है। इनका एनपीए महज 1.85 प्रतिशत है। सरकार का अगला लक्ष्य छह करोड़ का है। इसलिए अगले पांच वर्षों में इन समूहों को 10 लाख करोड़ और व्यक्तिगत महिला उद्यमियों को एक लाख करोड़ रुपये का ऋण देने का लक्ष्य है।
मिशन से जुड़े परिवारों की औसत आय में 49 प्रतिशत की वृद्धि हुई- नीति आयोग
नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े परिवारों की औसत आय में 49 प्रतिशत की वृद्धि हुई गई। सर्वेक्षण में 58 प्रतिशत महिलाओं ने अपने आत्मविश्वास में वृद्धि और 52 प्रतिशत ने आय के नए अवसर मिलने की बात कही है। इससे स्पष्ट है कि स्व-सहायता समूह महिलाओं को केवल कमाई का जरिया ही नहीं दे रहे, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम भी बना रहे हैं।
महिलाएं खेती, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मुर्गी पालन, सिलाई-कढ़ाई, खाद्य प्रसंस्करण और छोटे कारोबार के जरिए आय बढ़ा रही हैं। इससे महिलाओं की आय के साथ परिवार के आर्थिक फैसलों में उनकी भागीदारी भी बढ़ रही है।
शीर्ष-11 राज्यों में लखपति दीदियों की संख्या
राज्य - लखपति दीदियां
- महाराष्ट्र - 49,66,617
- बिहार - 43,40,227
- बंगाल - 34,20,962
- उत्तर प्रदेश - 33,52,157
- ओडिशा - 26,74,261
- मध्य प्रदेश - 23,67,520
- आंध्र प्रदेश - 22,73,869
- तेलंगाना - 17,31,262
- राजस्थान - 15,21,620
- गुजरात - 11,31,865
- झारखंड - 7,38,822
स्रोत - ग्रामीण विकास मंत्रालय
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