नई दिल्ली, प्रेट्र: एक संसदीय समिति ने कहा है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) में अधिकारियों की बड़े पैमाने पर कमी का असर इस एजेंसी की जांच-पड़ताल की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। समिति ने सरकार से रिक्त पदों को भरने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा है।

समिति के मुताबिक धोखाधड़ी करने वाले तत्व लगातार नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं और इस क्रम में निगरानी तंत्र की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। ऐसी स्थिति में जरूरी है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग जैसी संस्था अपनी क्षमताओं का विकास करें।

समिति का विचार है कि सीबीआइ का ढांचा उपयुक्त नहीं है। इस एजेंसी को 1300 करोड़ के बजट के मुकाबले केवल 802 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इसका असर एजेंसी के कामकाज पर पड़ेगा।

कार्मिक, जनशिकायतें, विधि और न्याय विभाग से संबंधित संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष भाजपा सांसद भूपेंद्र यादव हैं। समिति की रिपोर्ट राज्यसभा में प्रस्तुत की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक एक्जीक्यूटिव स्तर के 789, विधि अधिकारियों के 77 और तकनीकी अधिकारियों के लिए 415 पद रिक्त हैं। कम बजटीय आवंटन का असर सीबीआइ के अफसरों की ट्रेनिंग, रिसर्च, उपकरण और अन्य सुविधाओं पर पड़ेगा। समिति ने सुझाव दिया है कि सीबीआइ और सरकार, दोनों को आत्मचिंतन करते हुए उन कमियों की पहचान करनी चाहिए जिनके चलते एजेंसी का कामकाज प्रभावित हो रहा है।

Posted By: Nitin Arora

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