लखनऊ [जासं]। उत्तर प्रदेश में कुंडा [प्रतापगढ़] के डीएसपी जिया उल हक हत्याकांड मामले में विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया सहित आठ लोगों को सीबीआइ ने पाक साफ करार दे दिया। गुरुवार को सीबीआइ ने नार्को पॉलीग्राफी टेस्ट की जांच रिपोर्ट प्रभारी न्यायिक मजिस्ट्रेट नीलकांत मणि त्रिपाठी की अदालत में पेश की। इस पर सात अगस्त को सुनवाई होगी।

डीएसपी के भाई को मिली नौकरी

राजा भैया की सहमति और अदालत के आदेश पर सीबीआइ ने गत 21 जून को उनका नार्को टेस्ट कराया था। टेस्ट में पाया गया कि उनको किसी तरह की जानकारी या साजिश आदि का पता नहीं था। इसी तरह जांच और नार्को टेस्ट में विधायक के सहयोगियों रोहित सिंह, गुलशन यादव, हरिओम श्रीवास्तव, गुड्डू सिंह, सज्जन माली, रामसूरत, शिवमूरत और नन्हू राम गौतम को भी निर्दोष पाया गया।

अब बीमा के पैसे को लेकर डीएसपी के घर में घमासान

सीबीआइ ने मोबाइल कॉल डिटेल तथा अन्य गवाहों से भी पाया कि राजा भैया की संलिप्तता अथवा साजिश आदि नहीं रही। गौरतलब कि इस साल दो मार्च को कुंडा के बलीपुर गांव में प्रधान नन्हे यादव की हत्या हुई। आक्रोशित भीड़ ने मौके पर पहुंचे डीएसपी जिया उल हक पर हमला बोल दिया, जिसमें वह मारे गए। अगले दिन डीएसपी की पत्‍‌नी परवीन आजाद ने एफआइआर दर्ज कराकर कहा कि राजा भैया व इनके साथियों ने उनके पति की हत्या कर दी है। आरोप लगाया गया कि राजा भैया जिया उल हक से नाराज रहते थे और पहले भी धमकी दी जा चुकी थी।

मानहानि के दावे पर करूंगा फैसला : रघुराज

क्लीन चिट के बाद निर्दल विधायक रघुराज प्रताप सिंह ने कहा है कि वह अपने समर्थकों से राय-सलाह के बाद साजिशकर्ताओं के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करने पर फैसला लेंगे। अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह साजिश में शामिल लोगों का नाम नहीं लेंगे क्योंकि कुछ बातों पर पर्दा रहना चाहिए। पद से ज्यादा बड़ी प्रतिष्ठा होती है। इसीलिए हत्या के मामले रिपोर्ट दर्ज होने पर उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

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