2025-26 में DMK और AIADMK को दिया 260 करोड़ रुपये का चंदा, कोलकाता की लॉटरी फर्म ने क्यों लुटाए इतने पैसे?
कोलकाता की एक लॉटरी फर्म ने 2025-26 में तमिलनाडु की DMK और AIADMK को ₹260 करोड़ का चंदा दिया, जो पिछले वित्तीय वर्ष से दोगुना है।

लॉटरी फर्म ने डीएमके और एआईएडीएमके को दिया खूब चंदा।
HighLights
कोलकाता की टाइगर एसोसिएट्स ने ₹260 करोड़ का चंदा दिया।
DMK और AIADMK के कुल चंदे का 74% हिस्सा।
फर्म का संबंध लॉटरी कारोबारी सैंटियागो मार्टिन से।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कोलकाता की एक लॉटरी कंपनी ने 2025-26 में तमिलनाडु की दो मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पार्टियों डीएमके और एआईएडीएमके को 260 करोड़ रुपये का चंदा दिया। यह राशि पिछले वित्तीय वर्ष में इन पार्टियों को दिए गए चंदे से दोगुने से भी अधिक है।
चुनाव आयोग को सौंपी गई जानकारी के हवाले से न्यूज एजेंसी पीटीआई ने बताया, 2025-26 के लिए दोनों पार्टियों द्वारा बताए गए कुल 352.55 करोड़ रुपये के चंदे में से लगभग 74 प्रतिशत हिस्सा इसी फर्म का था। इससे पता चलता है कि उनका राजनीतिक फंड किस हद तक एक ही डोनर के हाथों में केंद्रित था।
किस पार्टी को कितना चंदा दिया?
टाइगर एसोसिएट्स ने 2024-25 में दो पार्टियों को 110 करोड़ रुपये दिए थे। इसके बाद 2025-26 में इसने एआईएडीएके को 135 करोड़ रुपये और डीएमके को 125 करोड़ रुपये दिए। इस तरह दो वित्तीय वर्षों में इन दोनों पार्टियों को दिए गए कुल योगदान की राशि 370 करोड़ रुपये हो गई।
एआईएडीएमके की चंदे से जुड़ी रिपोर्ट से पता चलता है कि टाइगर एसोसिएट्स ने उस वित्तीय वर्ष में कुल 135 करोड़ रुपये का भुगतान किया। यह फर्म एक साझा कारोबारी साथी के जरिए लॉटरी कारोबारी सैंटियागो मार्टिन से जुड़ी है। एआईएडीएमके को मिले कुल 161.36 करोड़ रुपये के चंदे में से लगभग 84 प्रतिशत हिस्सा इसी फर्म से आया था।
डीएमके के खुलासे के अनुसार, टाइगर एसोसिएट्स से कुल 125 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जो पार्टी को मिले कुल 191.19 करोड़ रुपये के चंदे का 65 प्रतिशत से अधिक है।
कॉर्पोरेट रिकॉर्ड से क्या पता चला?
टाइगर एसोसिएट्स के डेजिग्नेटेड पार्टनर सुब्बयन नागराजन, सैंटियागो मार्टिन के लंबे समय से सहयोगी रहे हैं। कॉर्पोरेट रिकॉर्ड से पता चलता है कि वे दोनों एक अन्य फर्म में भी पार्टनर हैं। फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को रद किए जाने से पहले मार्टिन की कंपनी फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वाली सबसे बड़ी कंपनी बनकर उभरी थी।
बाद में सार्वजनिक किए गए इलेक्टोरल बॉन्ड के खुलासों से पता चला कि फ्यूचर गेमिंग ने अब खत्म हो चुके फंडिंग सिस्टम के जरिए डीएमके को 509 करोड़ रुपये दिए थे। टाइगर एसोसिएट्स और फ्यूचर गेमिंग अलग-अलग इकाइयां हैं और उपलब्ध खुलासों से यह साबित नहीं होता कि मार्टिन ने व्यक्तिगत रूप से टाइगर एसोसिएट्स के राजनीतिक चंदे के लिए फंड दिया था।
हाल ही में सामने आए दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि एक ही वित्तीय वर्ष में इलेक्टोरल ट्रस्टों ने डीएमके और एआईएडीएमके दोनों को चंदा दिया। ट्रायम्फ इलेक्टोरल ट्रस्ट ने डीएमके को 15 करोड़ रुपये और एआईएडीएमके को 5 करोड़ रुपये दिए, जबकि जयभारत इलेक्टोरल ट्रस्ट ने क्रमशः 4 करोड़ रुपये और 3 करोड़ रुपये का योगदान दिया।
प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने डीएमके को अलग से 25 करोड़ रुपये दिए, जिससे इन तीन ट्रस्टों की ओर से दोनों पार्टियों को दिए गए कुल चंदे की रकम 52 करोड़ रुपये हो गई। टाइगर एसोसिएट्स और इन तीन इलेक्टोरल ट्रस्टों ने मिलकर कुल 312 करोड़ रुपये दिए, जो दोनों पार्टियों को मिले कुल चंदे का लगभग 88.5 प्रतिशत है।
डीएमके को मिले चंदे में आई गिरावट
हालांकि, डीएमके को मिलने वाले कुल चंदे में गिरावट आई है। यह 2024-25 में 365.82 करोड़ रुपये से घटकर 2025-26 में 191.19 करोड़ रुपये रह गया। दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान टाइगर एसोसिएट्स ने पार्टी को दिए जाने वाले अपने चंदे को 50 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 125 करोड़ रुपये कर दिया।
पार्टी के 2024-25 के खुलासे में 300 करोड़ रुपये से अधिक का नकद योगदान दर्ज किया गया था, जो मुख्य रूप से इसके पार्टी विकास कोष के तहत आया था। इस साल फरवरी और मार्च में तमिलनाडु चुनावों से पहले दोनों पार्टियों को काफी बड़ी धनराशि दी गई। इन चुनावों में डीएमके को हार का सामना करना पड़ा और सत्ता अभिनेता-राजनेता विजय द्वारा बनाई गई टीवीके के पास चली गई।
