नई दिल्‍ली, ऑनलाइन डेस्‍क। देश में कोरोना महामारी के बीच एक बहस यह भी चल रही है कि क्‍या वैक्‍सीन की दो डोज लेने से जान बच सकती है। कोरोना की वैक्‍सीन कितनी प्रभावशाली है। वैक्‍सीन की दो डोज से क्‍या कोरोना वायरस का असर कम होगा। इसके अलावा कौन सी कंपनी की वैक्‍सीन अच्‍छी है। कौन सी वैक्‍सीन ज्‍यादा प्रभावशाली है। देश में कोरोना वैक्‍सीन को लेकर चल रही सियासत के बीच कुछ लोगों के मन में यह सवाल भी उठ रहे हैं। इस बीच भारत सरकार ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए अपने टीकाकरण अभियान को तेज कर दिया है। अब देश में 18 वर्ष से ऊपर सभी आयु के लोगों को टीका लगाया जाएगा। आखिर सरकार के इस फैसले का क्‍या होगा असर। इस बाबत यशोदा हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. पीएन अरोड़ा ने भारत में वैक्‍सीन प्रक्रिया और लोगों के मन में उठ रहे सवालों का एक-एक करके उत्‍तर दिया। आइए जानते हैं उनके जवाब। 

शक से बाहर निकलिए, मौके का फायदा उठाइए

  • अपने उत्‍तर के क्रम में डॉ. अरोड़ा ने सबसे पहले लोगों की जिज्ञासा और मन में उठ रही भ्रांति से पर्दा उठाया। उन्‍होंने कहा कि सरकार द्वारा सुलभ वैक्‍सीन पूरी तरह से दुरुस्‍त है। वह कई चरणों के परीक्षण के बाद जनसाधारण के लिए सुलभ कराई गई है। उस पर किसी तरह की शक की गुजांइश नहीं है। उन्‍होंने कहा कि मौजूदा समय में देश में कोविशील्ड और कोवैक्सीन आम लोगों के लिए सुलभ है, यह देश में परीक्षण के बाद पेश की गई है। उन्‍होंने जोर देकर कहा कि इस लिए संदेह को मन से निकाल दीजिए। कोरोना महामारी से निपटने में यह पूरी तरह से कारगर है। सटीक है।
  • डॉ. अरोड़ा ने कहा कि मौजूदा समय में कई देशों ने अपनी-अपनी वैक्‍सीन विकसित की है। उन्‍होंने कहा वैक्‍सीन का निर्माण सरकारें नहीं, बल्कि दुनिया की चुनिंदा दवा कंपनियां कर रही हैं। अलबत्‍ता, सरकारों का उसमें सहयोग जरूर रहता है। हमारे देश में कई सरकारी एजेंसियों का उस पर नियंत्रण रहता है। उन्‍होंने कहा कि जिस तरह से एक ही रोग के लिए कई कंपनियां मे‍डीसिन तैयार करती हैं, उसी तरह से कोरोना वायरस से निपटने के लिए दुनिया की कुछ कंपनियां वैक्‍सीन तैयार कर रही है। सबके अपने तौर तरीके हैं। भारत ने अपने परीक्षण के बाद शुरुआत में दो वैक्‍सीन कंपनियों को वैक्‍सीन मुहैया कराने का आर्डर दिया।  
  • डॉ. अरोड़ा ने कहा कि भारत सरकार ने हाल में रूस में विकसित कोरोना वैक्सीन स्पुतनिक V की आपूर्ति के लिए हरी झंडी दी है। उन्‍होंने कहा सरकार कोई भी वैक्‍सीन लेती है तो उसका एक पूरा प्रोटोकॉल होता है। उसके तहत उस वैक्‍सीन का देश में पुन: परीक्षण होता है। उसकी टेस्‍टिंग होती है। इसके बाद वह आम जनता के लिए मुहैया कराई जाती है। उन्‍होंने कहा कि यह तकनीकी पहलू है, जिसे आम जनता नहीं समझ पाती है। सरकार बड़ी जवाबदेही तरीके से इस पर काम करती है।
  • डॉ. अरोड़ा ने कहा कि भारत सरकार ने टीकाकरण के मामले में मिसाल कायम की है। विकसित मुल्‍क भारत का अनुकरण कर रहे हैं। अन्‍य देशों की तुलना में भारत का टीकाकरण अभियान सबसे तेज रहा है। देश में अब तक 12 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्‍सीन की डोज दी जा चुकी है।
  • उन्‍होंने कहा कि हमारे देश की जनसंख्‍या को देखते हुए सरकार की टीकाकरण की रणनीति बेहद कारगर रही है। इतनी बड़ी आबादी को एक साथ टीकाकरण संभव नहीं था और सबको बचाना भी जरूरी था। डॉ. अरोड़ा ने कहा कि याद करिए जब 16 जनवरी को देश में टीकाकरण की शुरुआत हुई तो सरकार ने कोरोना के पहले फेज को ध्‍यान में रखते हुए रणनीति तैयार की। इसलिए सरकार ने सबसे पहले फ्रंटलाइनर और बुजुर्गों को वैक्‍सीन की डोज देने की नीति अपनाई। उन्‍होंने कहा कि कोरोना के पहले फेज में यह दोनों तबका ज्‍यादा संक्रमित था। इनके लिए ज्‍यादा खतरा था।
  • मार्च में कोरोना की दूसरी लहर ने सबको अचंभे में डाल दिया। कोरोना के नए वेरिएंट ने बच्‍चों और युवाओं को भी निशाना बनाया है। इसलिए सरकार ने पहले 45 से ऊपर के लोगों के लिए टीकाकरण की अनुमति दी। इसके बाद सरकार ने कहा कि अब 18 साल से ऊपर सभी लोगों को एक मई से कोरोना का टीका लगाया जाए। यह सरकार की बेहद वैज्ञानिक और तार्कित रणनीति है। आम जनता को इसमें सहयोग करना चाहिए, तभी हम इस वायरस को हराने में सफल होंगे।
  • डॉ. अरोड़ा का कहना है कि वैक्‍सीन की दो डोज लेने से कोरोना वायरस का प्रभाव सीमित हो जाता है और खतरे की संभावना कम होती है। यह नहीं कहा जा सकता कि वैक्‍सीन की दो डोज लेने के बाद आप संक्रमित नहीं हो सकते हैं। वैक्‍सीन की दो डोज लेने के बाद आप संक्रमित हो सकते हैं। इसलिए आपको भी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए।  

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