नेशनल डेस्क, नई दिल्ली। संशोधित मोटर वाहन अधिनियम के तहत ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर वाहन चालकों से भारी-भरकम जुर्माना वसूला जा रहा है। कई राज्य सरकारों ने इसमें छूट की घोषणा की है तो कई ने इसे लागू न करने का फैसला लिया है। आइए जानते हैं किस राज्य में क्या है स्थिति...

उत्तराखंड : उत्तराखंड सरकार ने गत बुधवार को संशोधित अधिनियम को जुर्माने में कटौती के साथ अपनाने का फैसला किया। राज्य मंत्रिमंडल ने फैसला किया कि अगर कोई अनधिकृत व्यक्ति वाहन चलाते पकड़ा जाए तो उस पर 2,500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि केंद्र ने 5,000 रुपये का जुर्माना प्रस्तावित किया था। इसी तरह, बिना लाइसेंस के वाहन चलाने या नाबालिग द्वारा सार्वजनिक स्थान पर वाहन चलाने पर 2,500 रुपये का जुर्माना लगेगा, जो केंद्र द्वारा प्रस्तावित 5,000 रुपये से कम है। अगर कोई ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अयोग्य घोषित हो जाता है और वह सार्वजनिक स्थान पर वाहन चलाता है तो उस पर केंद्र द्वारा प्रस्तावित 10,000 रुपये के बजाय 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। ड्राइविंग करते समय मोबाइल पर बात करने पर केंद्र सरकार ने 5,000 रुपये का जुर्माना प्रस्तावित किया, लेकिन उत्तराखंड ने इसे घटाकर 1,000 रुपये तक काटने का फैसला किया।

वायु प्रदूषण या ध्वनि प्रदूषण के मानकों के उल्लंघन के लिए केंद्र ने 10,000 रुपये का जुर्माना प्रस्तावित किया है, लेकिन राज्य सरकार ने फैसला किया है कि इस तरह के अपराध पर पहली बार 2,500 रुपये और दूसरी बार 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। बिना बीमा के वाहन चलाने पर केंद्र ने पहली बार के लिए 2,000 रुपये और दूसरी और उसके बाद के लिए 4,000 रुपये का जुर्माना प्रस्तावित किया है। राज्य सरकार ने इस कम करते हुए दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए पहली बार 1,000 रुपये और अन्य वाहनों के लिए 2,000 रुपये कर दिया है। इन श्रेणी के वाहनों के लिए दूसरी और उसके बाद के लिए जुर्माना दोगुना करने का फैसला किया है।

झारखंड : झारखंड सरकार ने नए कानून के तहत भारी भरकम जुर्माने से तीन माह तक राहत देने का फैसला किया है। इस दौरान पुराने कानून के तहत ही कार्रवाई होगी। गत शुक्रवार को हुई बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि तीन माह तक यातायात नियमों को लेकर लोगों के बीच सघन जागरूकता अभियान चलाया जाए। इस अवधि में लोगों को अपनी गाड़ियों के कागजात अपडेट कराने का भी समय मिल जाएगा।

दिल्ली : दिल्ली सरकार की ओर से अभी तक नए मोटर व्हीकल एक्ट को लेकर अधिसूचना नहीं जारी की गई है, लेकिन चालान नए नियम के तहत ही किए जा रहे हैं। इस चालान को कोर्ट में जमा करने को कहा जा रहा है।

यह है नया मोटर व्हीकल एक्ट-2019

  • बिना ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाने पर 5000 रुपये का चालान ट्रैफिक पुलिस काटेगी, पूर्व में यह महज 500 रुपये था।
  • अगर कोई नाबालिग वाहन चलाता है तो अब 500 रुपये की जगह 1000 रुपये का चालान कटेगा। इसके साथ ही वाहन से किसी भी ट्रैफिक नियम को तोड़ने पर वाहन मालिक के खिलाफ केस चलाने का प्रावधान है।
  • नए नियमों के मुताबिक शराब पीकर गाड़ी चलाने पर 6 महीने तक की कैद या 10000 रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। अगर दूसरी बार ऐसा किया तो 2 साल तक की कैद या 15000 रुपये का जुर्माना किया जा सकता है।
  • अगर गाड़ी तेज चलाई तो ओवरस्पीडिंग पर 1000 रुपये से 2000 रुपये तक का चालान काटा जाएगा। एलएमवी के लिए जुर्माना 400 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये और मीडियम पैसेंजर व्हीकल के लिए 2 000 रुपये किया गया है।
  • बिना सीट बेल्ट गाड़ी चलाने पर 100 रुपये की जगह 1000 रुपये का चालान कटेगा।
  • मोबाइल पर बात करते हुए ड्राइविंग करने पर 1000 रुपये की जगह 5000 रुपये तक फाइन लगेगा।
  • सड़क नियमों को तोड़ने पर 100 रुपये की जगह 500 रुपये का चालान कर दिया गया है।
  • दुपहिया वाहन पर ओवरलोडिंग करने पर 100 रुपये की जगह 2000 का चालान और 3 साल के लिए लाइसेंस निलंबित करने का प्रावधान है।
  • बिना इंश्योरेंस के ड्राइविंग पर 1000 की जगह 2000 रुपये का चालान कटेगा।
  • इमरजेंसी व्हीकल को रास्ता न देने पर एक हजार रुपये का चालान कटेगा और ओवरसाइज्ड व्हीकल पर 5 हजार रुपये का चालान कटेगा।

उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश में चालान के दो सिस्टम चलेंगे। राज्य के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अशोक कटारिया ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में यातायात नियमों के उल्लंघन पर चालान की पुरानी दरें ही लागू हैं। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि नई दरों से चालान न करें। हालांकि, मौके पर चालक जुर्माना न भरकर कोर्ट जाता है तो वहां नई दर से शुल्क वसूला जाएगा।

कर्नाटक : राज्य के परिवहन मंत्री लक्ष्मण सावदी के मुताबिक, संशोधित अधिनियम तीन सितंबर को लागू हो गया। हालांकि, राज्य सरकार जुर्माने को कम करने की अनुमति के लिए केंद्र सरकार से संपर्क करेगी। सरकार इस बारे में गुजरात सरकार से भी परामर्श करेगी। यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएंगे कि जुर्माने की राशि आम लोगों पर भारी न पड़े। उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के साथ चर्चा करने के बाद गुजरात की तरह जुर्माना राशि कम करने की घोषणा की जाएगी।

गुजरात : राज्य सरकार ने अधिनियम के तहत 15 मामलों में जुर्माना राशि में कटौती की है। अधिकांश मामलों में केंद्र द्वारा प्रस्तावित जुर्माने की राशि 50 फीसद कम की गई है तो कुछ में 70 फीसद तक की कमी की गई है। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने साफ कहा कि सरकार कठोर जुर्माना लगाकर लोगों को परेशान करना नहीं चाहती है। हमारी प्राथमिकता मानव जीवन की सुरक्षा है।

महाराष्ट्र : फिलहाल यहां संशोधित अधिनियम लागू नहीं किया गया है। पिछले हफ्ते परिवहन मंत्री दिवाकर रावते ने कहा कि उनके विभाग ने एक प्रशासनिक निर्णय लिया है, लेकिन संशोधित जुर्माना राशि की घोषणा करने से पहले यह कानून विभाग की राय का इंतजार कर रहा है।

ओडिशा : राज्य की राजधानी भुवनेश्वर में कई जगहों पर पुलिस और जनता के बीच विवाद को देखते हुए संशोधित अधिनियम का क्रियान्वयन तीन महीने के लिए रोक दिया गया है। मुख्यमंत्री बीजू पटनायक ने परिवहन विभाग को लोगों को इस कानून के बारे में बताने के लिए कहा है, ताकि इसे आसानी से लागू किया जा सके।

आखिर क्‍या है डिजिटल लॉकर
गौरतलब है कि डिजिटल लॉकर अथवा डिजिलॉकर (Digital Locker या Digi Locker) एक तरह का वर्चुअल लॉकर (virtual locker) है। इस सुविधा को खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार साल पहले जुलाई 2015 में लॉन्‍च किया था। यह अलग बात है कि इससे जुड़े नियमों को 2017 में नोटिफिाई किया गया था। इसके बाद परिवहन मंत्रालय की ओर से कहा जा चुका है कि एक बार लॉकर में अपने डाक्‍यूमेंट अपलोड करने के बाद उन्‍हें अपने पास हर समय रखने की जरूरत नहीं होती है। संबंधित अधिकारियों मसलन परिवहन विभाग और यातायात विभाग के अधिकारियों के मांगे जाने पर आप इसे दिखाकर अपना काम चला सकते हैं। अधिकारी को इसे मान्‍यता देना होगा, क्योंकि सरकार इसे मान्य करार दे चुकी है।

मध्य प्रदेश : राज्य ने संशोधित अधिनियम के क्रियान्वयन को यह कहते हुए रोक दिया गया है कि जुर्माना बहुत ज्यादा है। कानून मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि हम अन्य राज्यों में इसके क्रियान्वयन का अध्ययन करेंगे। इसके अलावा जुर्माने की राशि कम की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों के पास ऐसा करने का अधिकार है।

छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ ने भी पुरानी नीति को ही लागू रखा है। गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि हम यह पता कर रहे हैं कि राज्य सरकार इसमें संशोधन कर सकती है या नहीं।

पंजाब : पंजाब ने संशोधित नियमों को लागू नहीं किया है। परिवहन मंत्री रजिया सुल्ताना ने कहा कि फिलहाल संशोधित अधिनियम के प्रावधान राज्य में लागू नहीं होंगे। जब तक संशोधित मोटर वाहन अधिनियम के क्रियान्वयन पर कोई निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक पुराना नियम ही लागू रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि परिवहन राज्य सरकार का विषय है इसलिए पंजाब सरकार संशोधित मोटर वाहन अधिनियम के कुछ प्रावधानों को लागू करने में अपने विवेक का इस्तेमाल करेगी।

हरियाणा : राज्य ने केंद्र सरकार के नई नीति को लागू कर दिया है। हालांकि, राज्य में विधानसभा चुनाव को देखते हुए राज्य में तीन दिन का जागरूकता अभियान चलाया गया।

बिहार : सरकार ने एक सितंबर को आदेश पारित कर कहा है कि केंद्र द्वारा निर्धारित जुर्माना राज्य में लागू किया जाएगा।

केरल : केरल में नए नियमों के तहत पहले तीन दिन जुर्माना किया गया। इसके बाद जनता और ट्रेड यूनियनों के विरोध के बाद इस पर रोक लगा दी है। परिवहन मंत्री एके ससींद्रन ने कहा कि फिलहाल हमने संशोधित जुर्माना नहीं वसूलने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि वह गुजरात सरकार के फैसलों का अध्ययन कर रहे हैं। इसके बाद फैसला होगा।

पश्चिम बंगाल : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार संशोधित अधिनियम को लागू नहीं करेगी क्योंकि इससे लोगों पर बोझ पड़ेगा। राज्य में मौजूदा पश्चिम बंगाल मोटर वाहन नियम, 1989 जारी रहेगा। उनका साफ कहना है कि राज्य सरकार ने अपने यातायात सुरक्षा कार्यक्रम पर विशेष ध्यान दिया है और पुलिस और अन्य विभाग दुर्घटनाओं को कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

राजस्थान : राज्य ने नियमों को आंशिक रूप से लागू करने का निर्णय लिया है। तीन सितंबर को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने घोषणा की कि 17 तरह के मामलों में जुर्माना राशि कम रखी जाएगी ताकि लोग यातायात नियमों का पालन करने के लिए खुद प्रेरित हों। हालांकि, 16 गंभीर मामलों में जुर्माना संशोधन अधिनियम के तहत ही लगाया जाएगा।

त्रिपुरा : परिवहन मंत्री प्रणजीत सिंघा रॉय का कहना है कि कहा ये अच्छे संशोधन हैं। इसका कोई नकारात्मक पहलू नहीं है। हम इसे वैसे ही लागू करेंगे। राज्य सरकार ने इसके लिए एक जागरूकता अभियान शुरू किया है।

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Posted By: Sanjay Pokhriyal

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