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RSS की विचारधारा से प्रभावित हो इंडोनेशिया के पादरी रॉबर्ट बन गए संघ प्रचारक डा. सुमन कुमार

पादरी से संघ प्रचारक बने डा. सुमन कुमार बताते हैं कि आज झारखंड के सभी जिलों में हिंदू जागरण मंच का काम चल रहा है। 2015 से झारखंड-बिहार के क्षेत्र संगठन मंत्री हैं। डॉ. सुमन के अनुसार पूरे बिहार में भी अब संगठन का अच्छा काम शुरू हो गया है।

By Sanjay PokhriyalEdited By: Published: Tue, 13 Jul 2021 03:49 PM (IST)Updated: Tue, 13 Jul 2021 04:01 PM (IST)
हिंदू दर्शन व चिंतन से प्रभावित होकर स्वयं बन गए सुमन कुमार

संजय कुमार, रांची। कभी मतांतरण के काम में लगे पादरी राबर्ट सॉलोमन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा और संघ के अधिकारियों से मिले तो उनके प्रेम से इतने प्रभावित हुए कि स्वयं मतांतरित होकर डा. सुमन कुमार संघ के प्रचारक बन गए। संघ ने भी नया प्रयोग किया कि आरएसएस के विचारों को समझने के लिए इंडोनेशिया के जकार्ता से भेजे गए पादरी को अपनाने का निर्णय लिया और उस समय के प्रचारकों ने इन्हें इतना प्रेम दिया कि वे फिर भारत के ही होकर रह गए। आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में आर्गेनिक रसायन में रिसर्च करने के दौरान ही वे पादरी बन चुके थे और मतांतरण के काम से इनका भारत के तमिलनाडु की राजधानी चेन्‍नई में आना-जाना 1982 से शुरू था।

संघ की गतिविधियों को नजदीक से समझने के लिए ईसाई मिशनरियों ने 25 वर्ष की उम्र में 1984 में इन्हें भारत भेजा और दो वर्षों में संघ के कामों को नजदीक से देखने और हिंदू चिंतन व दर्शन से इतने प्रभावित हुए की स्वयं को हिंदू बनना स्वीकार किया। 1986 में मतांतरित होकर आर्य समाज पद्धति से हिंदू सनातन धर्म स्वीकार कर लिया। उसी वर्ष संघ के प्रचारक बन गए और हिंदू जागरण मंच के काम में लगाए गए। संघ के वरिष्ठ प्रचारक और आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डा. अशोक वार्ष्‍णेय कहते हैं कि सुमन कुमार को उस समय के संघ के प्रचारकों ने पुत्र की तरह पाला। ठाकुर राम गोविंद सिंह तो उनको पुत्र और वे उन्हें पिता मानने लगे थे, जो उत्तर प्रदेश के हिंदू जागरण मंच के संगठन मंत्री थे। ईसाई होने के कारण संघ ने नया प्रयोग करते हुए इन पर विश्‍वास किया और वे भी संघ की विचारधारा में पूरी तरह रंग गए। सुमन कुमार ने भाषा की समस्या को दूर करने के लिए वर्तमान अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख स्वांत रंजन से काफी सहयोग लि‍या। आज हिंदू जागरण मंच के उत्तर पूर्व क्षेत्र (झारखंड-बिहार) के संगठन मंत्री का दायित्व निभा रहे हैं और संघ के तृतीय वर्ष में प्रशिक्षित हैं।

बुंदेलखंड के उरई जिला में संघ के संपर्क में आए : दैनिक जागरण से बातचीत में सुमन कुमार ने बताया कि वे सबसे पहले बुंदेलखंड के उरई जिला में संघ के संपर्क में आए। जहां मैंने आवास रखा था वहीं नजदीक में संघ की शाखा लगती थी। मैं शाखा पर जाने लगा। संघ की शाखा सभी वर्ग के लोगों के लिए शुरू से ही खुला है। स्वयंसेवकों के कामों को नजदीक से देखा। उस समय के उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक जयगोपालजी के संपर्क में आया। उनका बौद्धिक सुना। उसी दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह जो अभी उत्तर प्रदेश में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं के संपर्क में आया। फिर संघ के प्रचारक ओंकार भावे जी, जो विहिप के संगठन मंत्री भी थे से संपर्क हुआ। मेरे सामने भाषा की समस्या थी। हिंदी आती नहीं थी। ओंकार भावे ने संघ की अंग्रेजी में पुस्तकें उपलब्ध कराई। स्वामी विवेकानंद की पुस्तकों को पढ़ा। फिर संघ के कामों को देखने के बाद मैंने तीन माह में ही मिशनरी को अपनी रिपोर्ट भेज दी।

अपनी रिपोर्ट में लिखा, जिनका मतांतरण कराते हैं उनका हो जाता है राष्ट्रांतरण : बतौर सुमन कुमार, भारत में भेजने से पहले मुझे बताया गया था कि संघ के लोग चर्च को तोड़ देते हैं। बाइबिल जला देते हैं। पादरियों पर हमला करते हैं। परंतु मुझे ऐसा कुछ नहीं दिखा। मिशनरियों को भेजे गए अपनी रिपोर्ट में मैंने लिखा की जिनका आप मतांतरण कराते हैं उनका राष्ट्रांतरण हो जाता है। ये लोग पादरियों को परेशान नहीं करते हैं। संघ विध्वंसक काम नहीं करता है। ये लोग भारत को कर्म भूमि, देव भूमि मानते हैं। ईसा मसीह का प्रचार करो परंतु मतांतरण मत करो। भारत में रहना है तो भारत को समझिए, भारत को जानिये और भारतीयता में रंगिये।

कानपुर में गुजरा लंबा वक्‍त : सुमन कुमार बताते हैं कि 1986 में गोरखपुर में हुई प्रचारक बैठक में मुझे संघ प्रचारक घोषित कर दिया गया। उसके बाद हिंदू जागरण मंच के काम को देखने की जिम्मेदारी दी गई। केंद्र कानपुर रखा गया। कारवालो नगर स्थित संघ कार्यालय में रहता था। काफी लंबा वक्‍त यहां गुजरा, संभाग प्रचारक रामशीष जी, सह प्रांत प्रचारक बालकृष्ण त्रिपाठी ने बहुत ज्यादा सहयोग किया। वहीं पर रहते हुए मैं हिंदू जागरण मंच का महानगर, विभाग, संभाग एवं प्रांत संगठन मंत्री का दायित्व संभाला। वर्ष 2000 में मेरा केंद्र लखनऊ हो गया और अवध प्रांत का संगठन मंत्री बन गया।

2004 में झारखंड प्रांत के संगठन मंत्री बने : सुमन कुमार ने कहा कि उस समय के सरकार्यवाह और वर्तमान समय में सरसंघचालक डा. मोहन भागवतजी ने मुझे वर्ष 2004 में झारखंड भेजा। वे झारखंड-बिहार का क्षेत्र प्रचारक रहते हुए यहां की परिस्थिति को समझ रहे थे। उस समय झारखंड के प्रांत प्रचारक डा. अशोक वार्ष्‍णेय थे। कानपुर के साथ-साथ यहां भी उनका पूरा सहयोग मिला।

कार्डिनल से मिली चुनौतियों का किया सामना : सुमन कुमार बताते हैं कि जब मैं झारखंड आया उस समय यहां मतांतरण तेज गति से चल रहा था। सिमडेगा और गुमला के इलाके में ज्यादा था। कार्डिनल का भी काफी प्रभाव था। एक वर्ष तक झारखंड को जानने का काम किया। फिर प्रवास करना शुरू किया। समाज में विश्‍वास पैदा किया कि ईसाई मिशनरियां आपकी हितैषी नहीं हैं। दो वर्षों तक कार्डिनल का विरोध किया। वे भी मुझे बाहरी कह कर लोगों को भड़काते थे। रांची के ओरमांझी में आदिवासी जमीन पर बनाए जा रहे चर्च को ध्वस्त कर दिया। जनजातियों को बताने का काम किया कि सरना और सनातन एक मां के पुत्र हैं। कार्डिनल को मतांतरण विषय पर चर्चा करने का भी प्रस्ताव दिया, परंतु वे आए नहीं। कार्यक्रमों में आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार को बुलाना शुरू किया, पाहन, पुजारी को सम्मानित किया, जिसका असर लोगों पर पड़ऩा शुरू हुआ। घर वापसी कार्यक्रम के तहत अब तक 8000 लोगों की घर वापसी करवा चुका हूं। आज झारखंड के सभी जिलों में हिंदू जागरण मंच का काम चल रहा है। 2015 से झारखंड-बिहार के क्षेत्र संगठन मंत्री हूं और केंद्र पटना है। पूरे बिहार में भी अब संगठन का अच्छा काम शुरू हो गया है।


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