नई दुनिया, भोपाल। एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध के बाद मध्य प्रदेश में पैदा हुए जातिगत मतभेदों को दूर करने के लिए ग्रामीण स्तर पर भारतीय किसान संघ समन्वय का काम करेगा। संघ किसानों के बीच एससी-एसटी एक्ट, आरक्षण जैसे मुद्दों से हटकर सरकार द्वारा ग्रामीण व किसानों के लिए लाई गई योजनाओं पर चर्चा करेगी।

मंगलवार को भारतीय किसान संघ के प्रांतीय अधिवेशन में इस मुद्दे को लेकर भी चर्चा हुई है। हालांकि, संघ के क्षेत्रीय संगठन मंत्री शिवकांत दीक्षित ने कहा कि ऐसा कोई विषय अधिवेशन में नहीं आया था।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अनुषांगिक संगठन के रूप में काम करने वाले भारतीय किसान संघ को ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की नाराजगी दूर करने की जिम्मेदारी दी गई है। ग्रामीण इलाकों में सभी वर्गो के बीच जाकर संघ सरकार की योजनाएं बताकर भाजपा से जोड़ने के एजेंडे पर काम करेगा।

विधानसभा चुनाव के ऐन पहले बुलाए गए इस अधिवेशन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिवेशन में संघ के प्रांतीय चुनाव के अलावा किसानों के विभिन्न मुद्दों पर बातचीत हुई। अधिवेशन में संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी भी मौजूद थे।

किसान के खाते में जाए सभी सब्सिडी 
संघ के क्षेत्रीय संगठन मंत्री ने कहा कि भारतीय किसान संघ की मांग है कि विभिन्न योजनाओं और उत्पादों पर किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी को खत्म कर पैसा सीधे किसानों के खातों में पहुंचाया जाए। इसके साथ ही मनरेगा को खेती से जोड़ा जाए, ताकि किसानों को खेती के लिए मजदूर उपलब्ध हो सकें। अधिवेशन में अगले तीन साल के लिए किसान संघ की कार्यकारिणी का चुनाव हुआ।

कैलाश ठाकुर को दोबारा किसान संघ का मध्यभारत प्रांत का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इसके अलावा रामभरोस बसोतिया को फिर प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। वहीं भारत पटेल को महाकौशल प्रांत का संगठन मंत्री, मनीष शर्मा को मध्य भारत प्रांत का संगठन मंत्री और कमल सिंह अंजना को मालवा का प्रांतीय अध्यक्ष बनाया गया है।

Posted By: Arun Kumar Singh