'संसद में बिल पारित कराने में बाधा न बने कांग्रेस', खरगे की चिट्ठी का रिजिजू ने दिया जवाब
किरण रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पत्र का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने मानसून सत्र के सत्रावसान और महिला आरक्षण विधेयक पर विशेष सत्र बुलाने की चर्चा की थी।

खरगे की चिट्ठी का रिजिजू ने दिया जवाब।
HighLights
रिजिजू ने खरगे के पत्र का दिया करारा जवाब।
महिला आरक्षण विधेयक पर कांग्रेस से सहयोग की अपील।
सत्रावसान पर संविधान में कोई तय अवधि नहीं।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के सत्रावसान नहीं होने और महिला आरक्षण व परिसीमन विधेयक पर विशेष सत्र बुलाये जाने की चर्चा को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र का संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू ने जवाब दिया है।
रिजिजू ने सर्वदलीय बैठक की मांग पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि उन्होंने खुद पहले तीन बार पत्र लिखकर और फिर राहुल गांधी से मिलकर चर्चा के लिए समय देने के लिए कहा था। लेकिन कांग्रेस उसे नजरअंदाज करती रही। इसलिए सरकार ने बाकी के दलों से विचार-विमर्श किया और प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
अब कांग्रेस की भी जिम्मेदारी बनती है कि महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में सकारात्मक सहयोग दे। वहीं सत्रावसान पर भी आंकड़ों के साथ जवाब दिया।
संविधान में सत्रावसान के लिए कोई तय अवधि नहीं- रिजिजू
किरण रिजिजू ने दो महीने बाद भी सत्रावसान नहीं होने के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि यह अपने आप में किसी भी संवैधानिक या प्रक्रियात्मक अनियमितता नहीं है। संविधान में सत्रावसान के लिए कोई तय अवधि नहीं दी गई है। वैसे पहले ऐसे कई उदाहरण रहे हैं। कांग्रेस काल में ही 2008 में तो सदन अनिश्चित काल के लिए स्थगित होने के 87 दिनों तक सत्रावसान नहीं हुआ था।
विशेषसत्र बुलाकर परिसीमन विधेयक पारित कराने की अटकलें तेज
गौरतलब है कि इस बार भी मानसून सत्र की समाप्ति के बाद लगभग 70 दिन हो चुके हैं। चूंकि सत्रावसान नहीं हुआ है इसलिए अटकलें तेज हैं कि कभी भी तीन दिन का विशेषसत्र बुलाकर परिसीमन विधेयक पारित कराया जा सकता है।
सर्वदलीय बैठक के सिलसिले में रिजिजू ने कहा कि इस साल 16 मार्च, 26 मार्च और 12 अप्रैल को खरगे को पत्र लिखा था और व्यक्तिगत रूप से भी इस मामले पर उनसे चर्चा कर समर्थन और सहयोग मांगा था। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र के दौरान, उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और इस विषय पर चर्चा की और उनका सहयोग मांगा। लेकिन कांग्रेस ने इसे तवज्जो नहीं दी।
इसके बाद डीएमके, सपा, वाइएसआरसीपी, शिवसेना (यूटीबी), एआइएमआइएम और बीजेडी सहित कई दलों के प्रतिनिधियों के साथ परामर्श किया। उन्होंने कहा कि परामर्श की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब केवल बिल को पास कराने के लिए कांग्रेस को सकारात्मक सहयोग करना चाहिए।
संविधान संशोधन के लिए सरकार ने नंबर जुटाए- सूत्र
सरकार के सूत्रों के अनुसार इस संविधान संशोधन के लिए सरकार ने नंबर जुटा लिए हैं। डीएमके, तृणमूल के टूटे 20 सांसदों के साथ साथ कई अन्य समर्थन के लिए तैयार हैं तो विपक्ष में कुछ ऐसे भी दल व सांसद हैं जो मतदान के वक्त गैरहाजिर होंगे। विपक्ष और खासकर कांग्रेस को यह डर सता रहा है।
