कम बारिश के बावजूद खरीफ की बुआई 5 साल के औसत से अधिक, पैदावार को लेकर चिंता बरकरार
कम बारिश के बावजूद इस साल खरीफ फसलों की बुआई पिछले पांच साल के औसत से अधिक रही है, जो किसानों की बदलती रणनीति को दर्शाती है।


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में इस साल खरीफ फसलों का कुल रकबा पिछले साल के मुकाबले 1% से अधिक घटा है। हालांकि, मानसून की कमी को देखते हुए इस गिरावट का अनुमान पहले से था, इसके बावजूद इस बार कुल बुआई पिछले पांच वर्षों के सामान्य औसत से ज्यादा दर्ज की गई है।
भले ही बढ़त मामूली है, लेकिन इससे साफ पता चलता है कि अगर किसानों को समय रहते मौसम की सही चेतावनी मिल जाए, तो वे अपनी बुआई की रणनीति में जरूरी बदलाव कर लेते हैं।
क्या कहते है बुआई के आंकड़े?
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार तक देश में कुल 1,107 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई हो चुकी है। यह आंकड़ा 1,104 लाख हेक्टेयर के सामान्य रकबे से 3 लाख हेक्टेयर अधिक है।
यह बढ़ोतरी तब दर्ज हुई है जब 1 जून से 26 सितंबर के दौरान मानसूनी बारिश में 12% की भारी कमी रही। इसकी तुलना में, वर्ष 2025 की इसी अवधि में 8% अधिक बारिश हुई थी और तब कुल रकबा 1,121 लाख हेक्टेयर रहा था।
धान और गन्ने की बुआई में किसानों की रुचि
खरीफ की सबसे प्रमुख और ज्यादा पानी चाहने वाली फसल धान के रकबे में पिछले साल की तुलना में 3.6% की गिरावट आई है, लेकिन यह अभी भी सामान्य औसत से 4.6% अधिक है। इसी तरह ज्यादा पानी की जरूरत वाली दूसरी फसल, गन्ने का रकबा भी सामान्य से अधिक रहा।
इससे पता चलता है कि किसान उन फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनसे बेहतर मुनाफे की उम्मीद हो, भले ही इसके लिए उन्हें भारी लागत का जोखिम उठाकर ग्राउंडवाटर के अत्यधिक दोहन पर निर्भर क्यों न रहना पड़ा हो।
फसलों की पैदावार पर पड़ सकता है असर
बारिश की कमी का असली असर फसलों की पैदावार पर दिखेगा, जिसके पहले अनुमान जल्द ही केंद्रीय कृषि मंत्रालय जारी करेगा। मानसून कोर जोन यानी मध्य भारत और बिहार के उन बड़े हिस्सों में, जहां सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं और खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर है, वहां बारिश की कमी और असमान वितरण चिंता का विषय बना हुआ है।
इसके चलते दलहन, तिलहन, कपास और मोटे अनाज के उत्पादन पर असर पड़ने की पूरी आशंका है। इसके अलावा, बिहार और असम के कुछ इलाकों में आई बाढ़ तथा महाराष्ट्र व कर्नाटक के कुछ हिस्सों में सूखे जैसे हालात भी कुल उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं।
रबी फसलों पर संकट से बचने के लिए सरकार की तैयारी
मानसून कमजोर रहने की वजह से मिट्टी में नमी की कमी हो गई है और सिंचाई के पानी की किल्लत की आशंका भी गहरा गई है। इससे आने वाली रबी फसलों पर बुरा असर पड़ सकता है।
इसी खतरे को देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्रालय सोमवार से शुरू हो रही दो दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक में कंटीन्जेंसी प्लान पर विचार-विमर्श करेगा।
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