अहमदाबाद [शत्रुघ्न शर्मा]। गुजरात में कांग्रेस को तीन दशक बाद पूर्व मुख्यमंत्री माधव सिंह सोलंकी की खाम थ्योरी [क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी व मुस्लिम] याद आई है। पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला की अगुवाई में केंद्रीय मंत्री व प्रदेश के आला नेता सत्ता के इस समीकरण को साधने के लिए जी-तोड़ कोशिश में जुट गए हैं।

गुजरात के प्रभावशाली एवं सफल मुख्यमंत्रियों में एक माधव सिंह सोलंकी ने खाम थ्योरी के दम पर नब्बे के दशक में विधानसभा की 182 में 148 सीटें जीतकर एक रिकार्ड कायम किया था। कांग्रेस ने इस बार इसी थ्योरी को अपनाने की रणनीति बनाई है।

कांग्रेस प्रचार समिति के अध्यक्ष शंकर सिंह वाघेला, नेता विपक्ष शक्तिसिंह गोहिल, माधव सिंह के पुत्र व केंद्रीय मंत्री भरत सिंह सोलंकी, सांसद जगदीश ठाकोर आदि क्षत्रिय वोट बैंक को मथ रहे हैं। जबकि मुस्लिम समुदाय को आकर्षित करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल सबसे पसंदीदा चेहरा हैं। इसके अलावा राज्य के एक दर्जन से अधिक मुस्लिम विधायक व पार्षद इस समुदाय को कांग्रेस के साथ खड़ा करने में जुटे हैं।

पटेल, क्षत्रियों के बाद राज्य की सबसे बड़ी आबादी आदिवासियों की है। इसे लुभाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अमर ¨सह चौधरी के पुत्र एवं केंद्रीय मंत्री तुषार चौधरी, सांसद प्रभा तावियाड़, पूर्व केंद्रीय मंत्री नारण राठवा तथा पूर्व सांसद मधुसूदन मिस्त्री जुट गए हैं। जबकि दलित समाज को पार्टी से जोड़ने के लिए सांसद प्रवीण राष्ट्रपाल, पूर्व सांसद राजू परमार, प्रदेश महासचिव गिरीश परमार और प्रवक्ता जयंती परमार आदि ने कमर कस ली है। भाजपा के पास मुस्लित व आदिवासी चेहरा नहीं है जिसका पूरा फायदा कांग्रेस को मिल सकता है।

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