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जिस विष्णु मूर्ति को लेकर सुनवाई में पूर्व CJI पर फेंका गया था जूता, 500 साल बाद उसका सिर मिला; धड़ से जुड़ेगा

Published: Wed, 14 Oct 2026 10:34 PM (IST)

खजुराहो के जावरी मंदिर में भगवान विष्णु की बिना सिर वाली मूर्ति का लापता सिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को ...और पढ़ें

खजुराहो स्थित जावरी मंदिर में विष्णु प्रतिमा का सिर मिला। फोटो: आर्काइव

खजुराहो स्थित जावरी मंदिर में विष्णु प्रतिमा का सिर मिला। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. खजुराहो के जावरी मंदिर में विष्णु मूर्ति का सिर मिला

  2. ASI को अपने संग्रहालय भंडार में मिला लापता सिर

  3. 11वीं सदी की मूर्ति का सिर धड़ से जुड़ेगा अब

वी के शुक्ला, नई दिल्ली। खजुराहो के जावरी मंदिर में भगवान विष्णु की बिना सिर की मूर्ति को देखकर श्रद्धालु सदियों से जो पीड़ा अनुभव करते आ रहे हैं, अब वह दूर होने की उम्मीद जगी है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को 11वीं सदी की इस सात फीट ऊंची मूर्ति का लापता सिर अपने ही एक संग्रहालय के भंडार में मिल गया है। विशेषज्ञों की टीम सिर की जांच कर रही है। तकनीकी अध्ययन और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इसे दोबारा प्रतिमा के धड़ से जोड़ने की तैयारी है।

1910 में बने संग्रहालय में मिला मूर्ति का सिर

ASI के महानिदेशक डाॅ. यदुबीर सिंह रावत ने बताया कि विभाग के भंडार में मूर्ति का सिर मिला है। मूर्ति से सिर कैसे अलग हुआ, इसके ASI के पास प्रमाण मौजूद नहीं हैं।

खजुराहो के जिस संग्रहालय में सिर मिला है, इसकी स्थापना 1910 में ब्रिटिश अधिकारी डब्ल्यू. ए. जार्डिन द्वारा की गई थी। उन्होंने खजुराहो के मंदिरों के आसपास बिखरी हुई मूर्तियों को सहेजने के लिए इसे मातंगेश्वर मंदिर के पास एक खुले परिसर में स्थापित किया था।

तब इसे जार्डिन म्यूजियम कहा जाता था। 1952 में यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के नियंत्रण में आया और उस समय इसका नाम बदलकर पुरातत्व संग्रहालय किया गया।

ASI के एक अधिकारी ने कहा कि संग्रहालय में मौजूद सिर भगवान विष्णु की मूर्ति का सिर है, इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सिर 1910 में स्थापना के समय से ही संग्रहालय में मौजूद था।

मूर्ति के पुनरुद्धार की मांग पहुंची थी सुप्रीम कोर्ट

खजुराहो के जावरी मंदिर में बिना सिर वाली विष्णु मूर्ति को लेकर विवाद पिछले साल सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जब हरियाणा के वकील राकेश दलाल ने इसके पुनरुद्धार, प्रतिस्थापन या सात फुट की मूर्ति के पुनर्निर्माण की मांग की थी।

याचिका में दावा किया गया था कि करीब 500 साल पहले मुगल आक्रमणों के दौरान प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया गया था। जब यह याचिका लंबित थी, तब तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने कहा था, "जाओ और खुद देवता से कहो कि वे अब कुछ करें।"

तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका खारिज कर दी थी। हालांकि गवई ने बाद में स्पष्ट किया था कि वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं, लेकिन इस मामले के बाद एक वकील ने अदालत कक्ष के भीतर ही उन पर जूता फेंकने की कोशिश की थी।

चंदेल शासकों के काल का है मंदिर

खजुराहो के पूर्वी मंदिर समूह में स्थित जावरी मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। इसका निर्माण चंदेल शासकों के शासनकाल में 11वीं सदी के उत्तरार्ध में हुआ माना जाता है।

मंदिर की ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्ता के कारण यह खजुराहो के विश्व धरोहर स्मारक समूह का हिस्सा है। अब मूर्ति का सिर मिलने से उसके मूल स्वरूप को स्थापित करने की उम्मीद बढ़ गई है।

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