तिरुवनंतपुरम, प्रेट्र/एएनआइ। केरल में जानलेवा निपाह वायरस ने एक बार फिर दस्तक दे दी है। एर्नाकुलम के 23 साल के एक छात्र में निपाह वायरस की पुष्टि हुई है। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने बताया कि अन्य चार लोगों में निपाह वायरस जैसे लक्षण पाए गए हैं, उनके खून के सैंपल को जांच के लिए भेजा गया है। छात्र के परिजनों समेत अन्य 80 लोगों को निगरानी में रखा गया है। राज्य में पिछले साल इस वायरस ने 17 लोगों की जान ले ली थी।

वहीं, नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि केंद्र की तरफ से छह डॉक्टरों की एक टीम को जांच के लिए केरल भेजा गया है। वह लगातार केरल सरकार के संपर्क में है। उन्होंने राज्य सरकार को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है। उन्होंने सुबह अपने आवास पर स्वास्थ्य सचिव समेत अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की। वन विभाग से भी संपर्क किया गया है, ताकि चमगादड़ों में निपाह वायरस का पता लगाया जा सके। बता दें कि चमगादड़, सूअर और निपाह वायरस से संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने पर यह वायरस फैलता है।

केरल की स्वास्थ्य मंत्री शैलजा ने बताया कि पीडि़त छात्र को कोच्चि में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। छात्र के खून के नमूने को जांच के लिए पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) भेजा गया था। मंगलवार सुबह आई रिपोर्ट में छात्र में निपाह वायरस की पुष्टि हुई है। शैलजा ने बताया कि छात्र की हालत ठीक है। घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

इलाज की समुचित व्यवस्था की गई है। कोच्चि स्थित कलामसेरी मेडिकल कॉलेज अस्पताल समेत राज्य के सभी जिला अस्पतालों में निपाह वायरस के लिए अलग वार्ड बनाए गए हैं। राज्य के मुख्यमंत्री पी विजयन ने कहा कि सरकार लगातार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संपर्क में बनी हुई है। उन्होंने भी लोगों से कहा है कि डरने की कोई बात नहीं है, वायरस से बचाव के एहतियाती उपाय किए गए हैं।

पिछले साल भी फैला था प्रकोप
केरल में पिछले साल भी निपाह वायरस का प्रकोप फैला था। कब कोझीकोड में 14 और मलप्पुरम में तीन मरीजों की मौत हो गई थी। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने पिछले साल निपाह वायरस से सफलतापूर्वक जंग लड़ी थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस बारे में अफवाह न फैलाने की अपील की है।

बीमारी के लक्षण
निपाह वायरस इंसेफलाइटिस यानी दिमागी बुखार का ही एक रूप है। इसमें सिर दर्द, तेज बुखार, सुस्ती, उलझन, याद्दाश्त कमजोर होना, भ्रम होना, मिर्गी आना और दौरे पड़ने की शिकायत होती है। मरीज कोमा में भी चला जाता है। इस वायरस का अभी तक कोई टीका नहीं विकसित हुआ है। इसके लक्षणों पर ही इलाज होता है।

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Posted By: Manish Pandey

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