मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी में प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी में सबसे आगे चल रहे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर महाकुंभ में अब विरोधी स्वर गूंजने लगे हैं। महाकुंभ में जहां अगले कुछ दिनों में मोदी आने वाले हैं और संत समाज के भी मोदी का नाम पीएम पद के लिए आगे बढ़ाने की बात हो रही है, उसमें मोदी उनके विरोधी स्वर उठने की खबर बुरी हो सकती है। महाकुंभ में शामिल कुछ संतों ने कहा है कि वह मोदी का स्वागत नहीं करेंगे।

महाकुंभ में आए संतों में जहां एक धड़ा मोदी का बेसबरी से इंतजार कर रहा है कि वहीं दूसरे गुट का कहना है कि महाकुंभ आस्था रखने वालों के लिए जगह है, लेकिन राजनीति का अखाड़ा बनाने वालों की यहां जरूरत नहीं है। संत समाज के सदस्य स्वामी अधोक्षजानंद ने कहा कि कुंभ यह लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है, इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने जहां मोदी समर्थकों को नकली संत तक करार दिया वहीं उन्होंने गुजरात नरसंहार के लिए मोदी से माफी मांगने की भी मांग कर डाली। उन्होंने कहा कि जबतक मोदी ऐसा नहीं करते हैं तब तक मोदी का कोई स्वागत यहां नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि सात फरवरी को यहां पर आरएसएस और संतों के बीच होने वाली वार्ता में मोदी का नाम पीएम पद के लिए आगे बढ़ाने पर चर्चा होने की खबर है। ऐसे में मोदी के लिए उभरे विरोधी स्वर उनको मुश्किलों में डाल सकते हैं।

इससे पहले कल प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी को लेकर जदयू से बढ़ती रार के बीच भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने भी गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को सक्षम और लोकप्रिय नेता बताया था। महाकुंभ के दौरान पीएम पद की उम्मीदवारी, खासतौर पर मोदी के नाम पर मुहर को लेकर आशंकित जदयू की चेतावनी के बाद राजनाथ का यह बयान सामने आया है। वहीं विहिप नेता अशोक सिंघल भी मोदी के साथ खड़े हो गए हैं।

रविवार को भोपाल में संवाददाताओं से बातचीत में राजनाथ ने यह भी माना कि इस वक्त ऐसे किसी उम्मीदवार का चुनाव मुश्किल है जो भाजपा समेत पूरे राजग को स्वीकार हो। मोदी के नाम को आगे बढ़ाने से संकोच के सवाल पर भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि परंपरा यही रही है कि इस बारे में फैसला पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी में अच्छे नेताओं की कमी नहीं है।

बहरहाल, भाजपा नेताओं ने सहयोगी दल जदयू की चिंता किए बगैर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए योग्य बताते हुए परोक्ष रूप से उनके नाम की घोषणा का दबाव बना दिया है। इसी मुहिम में जदयू प्रवक्ता शिवानंद तिवारी के बयान के बाद भाजपा नेताओं ने सहयोगी दल पर तीखा जवाबी हमला बोला। शिवानंद का कहना है कि इस तरह के फैसले राजनीतिक होते हैं इसमें साधु-संतों को शामिल कर किस दिशा में जाया जा रहा है।

इस बयान के जवाब में भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह की संयम बरतने की चेतावनी का भी पार्टी नेताओं पर कोई असर नहीं दिखाई पड़ रहा। नकवी के अलावा सांसद कीर्ति आजाद और बलबीर पुंज ने भी परोक्ष तौर पर मोदी की वकालत की। अशोक सिंघल ने यह कहकर मोदी के नाम की हवा तेज कर दी है कि भाजपा को जनता की पसंद के अनुसार फैसला करना चाहिए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि खुद भाजपा अध्यक्ष मोदी की लोकप्रियता स्वीकार करते हैं।

मालूम हो कि भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह छह फरवरी को महाकुंभ जा रहे हैं। खबर यह भी है कि उसी वक्त संघ प्रमुख मोहन भागवत और मोदी भी प्रयाग जा सकते हैं। उसी वक्त प्रयाग में विश्व हिंदू परिषद की धर्म संसद भी है।

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