कर्नाटक की जनता पर महंगाई की मार, दूध के बाद महंगा हुआ नंदिनी का घी-मक्खन और पनीर
कर्नाटक में नंदिनी ब्रांड के घी, मक्खन और पनीर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की गई है, जो 4 नवंबर ...और पढ़ें

(AI से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
नंदिनी घी, मक्खन, पनीर के दाम 4 नवंबर से बढ़े।
दूध-दही के बाद नंदिनी घी, मक्खन, पनीर महंगे हुए।
सरकार ने किसानों के लिए मूल्य वृद्धि को उचित बताया।
डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। कर्नाटक के लोगों को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। दूध और दही के दाम बढ़ाने के ठीक एक हफ्ते बाद, कर्नाटक के मशहूर ब्रांड नंदिनी ने राज्यभर में घी, मक्खन और पनीर की कीमतों में भी भारी इजाफा कर दिया है।
बेंगलुरु मिल्क यूनियन द्वारा जारी नई दरें 4 नवंबर से लागू हो चुकी हैं। अमूल के बाद नंदिनी के दाम बढ़ने से आम आदमी की जेब पर और अधिक बोझ पड़ गया है।
किस चीज के कितने बढ़े दाम?
घी- 1 लीटर नंदिनी घी का पैकेट जो पहले 715 रुपये में मिलता था, अब उसके लिए 850 रुपये चुकाने होंगे। वहीं, PET जार में आने वाला 1 लीटर घी अब 870 रुपये का हो गया है।
पनीर- 1 किलो पनीर की कीमत 408 रुपये से बढ़कर अब 485 रुपये हो गई है।
मक्खन- 500 ग्राम अनसाल्टेड मक्खन जो पहले 285 रुपये का मिलता था, अब वह 390 रुपये में मिलेगा।
क्या हैं अन्य नए रेट?
दूसरी तरफ, बेंगलुरु मिल्क यूनियन के सर्कुलर के मुताबिक, अलग-अलग पैक साइज की कीमतें इस प्रकार हैं।
- घी- 200 मिली का पाउच 95 रुपये, 500 मिली का पैक 425, जबकि 5 लीटर का जार अब 4,250 रुपये में मिलेगा।
- मक्खन- 100 ग्राम साल्टेड बटर 90 रुपये, 500 ग्राम साल्टेड बटर 380 रुपये और 200 ग्राम अनसाल्टेड बटर 160 का हो गया है।
- पनीर- 200 ग्राम पनीर 115 रुपये, 500 ग्राम 260 रुपये और मीडियम-फैट पनीर 200 ग्राम 110 रुपये में मिलेगा।
- दूध- इसके 135 मिली पैक की कीमत 11 रुपये और 450 मिली पैक की कीमत 33 रुपये कर दी गई है।
अभी अभी तो बढ़े थे दूध और दही के दाम
गौरतलब है कि यह बढ़ोतरी कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) द्वारा दूध के दाम 8 रुपये प्रति लीटर और दही के दाम 14 रुपये प्रति लीटर बढ़ाने के ठीक बाद आई है, जो 1 नवंबर से लागू हुए थे।
इस बढ़ोतरी के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। सोमवार को विपक्षी पार्टी बीजेपी की महिला विंग ने बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में जोरदार प्रदर्शन किया और कांग्रेस सरकार से इस बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग की।
राज्य सरकार का क्या है तर्क?
दूसरी ओर मूल्य वृद्धि का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि इस फैसले से करीब 11 लाख किसान परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा। उन्होंने तर्क दिया कि डेयरी किसानों का समर्थन करने और दूध को अन्य राज्यों में जाने से रोकने के लिए यह बढ़ोतरी जरूरी थी।
शिवकुमार ने यह भी बताया कि इस कदम के बाद लगभग 10 लाख लीटर दूध वापस कर्नाटक की डेयरियों में आना शुरू हो गया है। हालांकि, सरकार ने लोगों को थोड़ी राहत देते हुए दही के दाम में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती करने की घोषणा भी की थी, लेकिन इसके तुरंत बाद घी और मक्खन के दाम बढ़ने से उपभोक्ताओं को झटका लगा है।
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