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'फेल हो रहे इंजन', एथनॉल मिश्रण विवाद के बीच डीके शिवकुमार ने केंद्र पर लगाया पर्दा डालने का आरोप

Published: Sun, 08 Nov 2026 12:29 PM (IST)

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने केंद्र पर पेट्रोल में तय सीमा से अधिक एथनॉल मिलाने का आरोप लगाया है, जिससे वाहनों में इंजन संबंधी समस्याएं आ रही हैं।

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डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को पेट्रोल में तय सीमा से अधिक एथनॉल मिलाए जाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि इस मिलावट के कारण हजारों वाहनों में बार-बार इंजन बंद होने और माइलेज घटने जैसी गंभीर समस्याएं आ रही हैं।

शिवकुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने 67 स्थानों से पेट्रोल के नमूने एकत्र किए हैं और तय सीमा से अधिक एथनॉल की शिकायतों की जांच शुरू कर दी है।

पेट्रोल पंपों पर हो रही है मिलावट: शिवकुमार

मुख्यमंत्री ने कहा कि वाहनों के इंजन बार-बार बंद हो रहे हैं और माइलेज घट गया है। हमारी जांच का लगभग 30 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। सरकार इसे छिपा नहीं सकती। केंद्र सरकार को इन स्थानों की जानकारी दे दी गई है और सोमवार को हमारे मंत्री आधिकारिक रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी विस्तृत आंकड़े सामने रखेंगे।

शिवकुमार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह अत्यधिक मिलावट तेल आपूर्ति के दौरान नहीं, बल्कि सीधे पेट्रोल पंपों पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमने जांच की है और मिलावट सीधे पेट्रोल बंकों पर हो रही है, जहां से इसे वाहनों में डाला जाता है।

हमारे पास इसके पूरे दस्तावेज हैं। चूंकि एथनॉल सस्ता मिलता है, इसलिए मुनाफा कमाने के लिए इसमें अधिक मिलावट की जा रही है। हम इसकी निंदा करते हैं। यह बेहद खतरनाक है और आम जनता को जागरूक करने के साथ-साथ सुरक्षित करना जरूरी है।

तय सीमा 20% के मुकाबले 31.2% तक एथनॉल पाए जाने का दावा

यह विवाद कर्नाटक सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों के बीच चल रही तनातनी के बीच सामने आया है।

इससे पहले राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिजवान अरशद ने कहा था कि बेंगलुरु, कोलार, चिक्काबल्लापुरा, रामनगर, मंगलुरु और तुमकुरु सहित सात स्थानों से लिए गए पेट्रोल के नमूनों की जांच में एथनॉल की मात्रा 31.2 प्रतिशत तक पाई गई, जबकि सरकारी नियमों के अनुसार यह सीमा अधिकतम 20 प्रतिशत (E20) ही होनी चाहिए।

जांच के तरीके पर उठाए सवाल

दूसरी ओर, देश की प्रमुख तेल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने एक संयुक्त बयान जारी कर इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

कंपनियों का कहना है कि कर्नाटक सहित पूरे देश में उनकी तरफ से सप्लाई किया जा रहा पेट्रोल भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के ई-20 मानकों के पूरी तरह अनुरूप है।

तेल कंपनियों ने राज्य सरकार की अक्टूबर की सैंपलिंग और टेस्टिंग पद्धति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह जांच थर्ड-पार्टी लैब रिपोर्टों पर आधारित है, जिनमें निर्धारित वैधानिक और तकनीकी प्रक्रियाओं का ठीक से पालन नहीं किया गया है।

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