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'भारत लोकतंत्र है, कोई कॉलोनी नहीं'; कमल हासन का एलन मस्क को करारा जवाब

Published: Sat, 10 Oct 2026 02:14 PM (IST)

कमल हासन ने एलन मस्क को भारत की सैटेलाइट इंटरनेट नीति पर करारा जवाब दिया, कहा कोई भी अरबपति देश की नीति तय नहीं कर सकता।

अभिनेता और राज्यसभा सांसद कमल हासन(फाइल फोटो)

अभिनेता और राज्यसभा सांसद कमल हासन(फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, चेन्नई। अभिनेता से राजनेता बने और राज्यसभा सांसद कमल हासन ने अमेरिकी अरबपति और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क को करारा जवाब दिया है। मस्क ने भारत में स्टारलिंक को मंजूरी मिलने में हो रही देरी को लेकर सवाल उठाए थे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कमल हासन ने कहा कि कोई भी अरबपति चाहे वह भारतीय हो या अमेरिकी किसी देश की नीति तय नहीं कर सकता।

कमल हासन ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि भारत अच्छी तरह जानता है कि टेलीकॉम नेटवर्क और स्पेक्ट्रम केवल व्यावसायिक संपत्ति नहीं, बल्कि देश का रणनीतिक ढांचा हैं। उन्होंने कहा कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था पर कोई समझौता नहीं हो सकता।

इंटरनेट सस्ता हो, डिजिटल अंतर न बढ़ाए

उन्होंने कहा कि भारत को सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में भारतीय और वैश्विक कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा का स्वागत करना चाहिए। प्राथमिकता उन कंपनियों को मिलनी चाहिए जो दूर-दराज के इलाकों में सबसे व्यावहारिक और सस्ती सेवा उपलब्ध करा सकें।

हासन ने कहा कि कम प्रति-व्यक्ति आय वाले देशों में सैटेलाइट इंटरनेट किफायती होना चाहिए। अगर उपकरण और सब्सक्रिप्शन का खर्च बहुत अधिक होगा, तो यह आम परिवारों की पहुंच से बाहर हो जाएगा। कनेक्टिविटी को डिजिटल अंतर मिटाना चाहिए, न कि नया अंतर पैदा करना चाहिए।

पश्चिमी देशों का दोहरा रवैया

कमल हासन ने पश्चिमी देशों के दोहरे रवैये पर निशाना साधते हुए कहा कि जो देश खुद संरक्षणवाद यानी स्वदेशी को बढ़ावा देने की नीति अपनाते हैं, वे दूसरों को फ्री मार्केट का ज्ञान न दें।

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपने घरेलू उद्योग की सुरक्षा के लिए चीनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर 100% टैरिफ लगाया, ठीक वैसे ही जैसे भारत अपने घरेलू निर्माताओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाता है।

भारत और अमेरिका दोनों ने ही सुरक्षा कारणों से हुआवेई पर प्रतिबंध लगाया है। कोई भी देश केवल अपने फायदे के समय बराबरी के मौके की मांग नहीं कर सकता।

हम अपने देश में खुद सवाल भी उठाएंगे

हासन ने स्पष्ट किया कि एक लोकतांत्रिक देश होने के नाते भारतीय अपनी ताकतों और कमियों पर खुद बहस करेंगे और सवाल भी पूछेंगे। उन्होंने भारतनेट योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि हम सवाल जरूर पूछेंगे कि सीएजी की 2026 की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, 39888 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद भारतनेट योजना अपने मूल उद्देश्यों को पूरा करने में क्यों संघर्ष कर रही है? केवल 33.2% ग्राम पंचायतें ही चालू स्थिति में क्यों थीं?

उन्होंने यह भी कहा कि इसके साथ ही हमें अपने टेलीकॉम क्षेत्र और नियमों की सराहना भी करनी चाहिए, जिसने इंटरनेट डेटा को दुनिया में सबसे सस्ता बनाया और करोड़ों लोगों को ऑनलाइन जोड़ा।

भारत अपना भविष्य खुद तय करेगा

अपने बयान के अंत में कमल हासन ने कहा कि भारत एक लोकतंत्र है, कोई उपनिवेश नहीं। हम दुनिया का स्वागत करते हैं, लेकिन हम भारत के लोग अपना भविष्य खुद तय करेंगे, न कि पश्चिमी स्वार्थी हित, उनका दोहरा रवैया या कोई अरबपति चाहे वह भारतीय हो या अमेरिकी।

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