जजों की नियुक्ति संबंधी एमओपी मामले की सुनवाई से अलग हुए जस्टिस नरसिम्हा, क्या है वजह?
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने जजों की नियुक्ति से जुड़े मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (एमओपी) के मसौदे में देरी संबंधी याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।

जजों की नियुक्ति संबंधी एमओपी मामले की सुनवाई से अलग हुए जस्टिस नरसिम्हा।
HighLights
जस्टिस नरसिम्हा ने एमओपी मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया।
जजों की नियुक्ति प्रक्रिया में देरी पर जनहित याचिका दायर हुई थी।
पूर्व में एनजेएसी मामले में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल थे।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के के जज जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने सोमवार को एक जनहित याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति से जुड़े 'मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर' (एमओपी) के संशोधित मसौदे को अंतिम रूप देने में हो रही देरी के संबंध में दायर की गई थी। एमओपी सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति, पदोन्नति और तबादले की प्रक्रिया संबंधी दस्तावेज है।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष होनी थी। गैर सरकारी संगठन लोक प्रहरी की याचिका में कहा गया कि केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच बार-बार पत्राचार के बावजूद संशोधित एमओपी करीब 11 साल से लंबित है।
जस्टिस नरसिम्हा ने इस मामले की सुनवाई से खुद को इसलिए अलग किया, क्योंकि वह पहले शीर्ष अदालत में राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) संबंधी मामले में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के रूप में पेश हुए थे।
सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति और तबादले के लिए कोलेजियम प्रणाली को बदलने एनजेएसी गठित करने के लिए कानून बनाया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस कानून को खारिज कर दिया।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)