जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। एक समय राजीव गांधी की कांग्रेस सरकार को हिला कर रख देने वाले बोफोर्स तोप दलाली कांड की सुनवाई मंगलवार को भी नही हो सकी। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई कर रही पीठ के एक न्यायाधीश एएम खानविल्कर ने स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया। जिसके वजह से मामले पर सुनवाई 28 मार्च तक के लिए टल गई। हालांकि मंगलवार को सुनवाई पर वकील अजय अग्रवाल की याचिका लगी थी लेकिन सीबीआइ ने भी कोर्ट को सूचित किया कि उसने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल कर दी है।

रायबरेली से सोनिया गांधी के खिलाफ भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ने वाले वकील अजय अग्रवाल ने 64 करोड़ के बोफोर्स दलाली कांड में हिन्दुजा बंधुओं को आरोपमुक्त करने के दिल्ली हाईकोर्ट के 2005 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है। अग्रवाल की यह याचिका पिछले 12 सालों से लंबित है। बताते चलें कि सीबीआई ने पहले इस मामले में कोई अपील दाखिल नहीं की थी। अब 12 साल बाद सीबीआई ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की है। जो कि अभी सुनवाई पर नहीं आयी है।

मंगलवार को अजय अग्रवाल की याचिका मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, एएम खानविल्कर और डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ के समक्ष सुनवाई पर लगा था। लेकिन जैसे ही सुनवाई का नंबर आया जस्टिस खानविल्कर ने स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया। इस पर पीठ ने मामले की सुनवाई 28 मार्च तक टाल दी। अब 28 मार्च को यह केस उस पीठ के समक्ष लगेगा जिसमें जस्टिस खानविल्कर नहीं होंगे। इस बीच सीबीआइ की ओर से पेश एएसजी तुषार मेहता ने ब्यूरो की ओर से मामले में दाखिल की गई एसएलपी की जानकारी देते हुए कोर्ट से कहा कि उन्होंने भी हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ एसएलपी दाखिल कर दी है। तकनीकी कारणों से उनकी एसएलपी अभी रजिस्ट्री में लंबित है।

पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने अग्रवाल से कहा था कि वे पहले कोर्ट को इस बारे में संतुष्ट करें कि क्रिमिनल केस में किसी तीसरे पक्ष की अपील पर कोर्ट को क्यों सुनवाई करनी चाहिए। कोर्ट ने कहा था कि आपराधिक मामले अलग तरह के होते हैं उसमें जिस व्यक्ति का केस से कोई लेना देना नहीं उसे क्यों सुना जाना चाहिए। हालांकि अग्रवाल ने कोर्ट से कहा था कि ये मामला बहुत महत्वपूर्ण है। जनता के पैसे से खरीद हुई थी इसलिए कोर्ट को मामले में सुनवाई करनी चाहिए।

 

By Kishor Joshi