नई दिल्ली (जेएनएन)। एजेंसी विधि आयोग के चेयरमैन जस्टिस ([सेवानिवृत्त)] बीएस चौहान ने देश की कानून प्रणाली में खामियों पर अपना दर्द बयां किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय कानून प्रणाली इतनी जटिल और महंगी है कि गरीब आदमी न्याय के लिए तरसता रह जाता है। उन्होंने यहां तक कहा कि बड़े वकील टैक्सियों की तरह फीस लेते हैं।

'कैदियों के अधिकार' विषय पर शनिवार को यहां आयोजित सेमिनार में जस्टिस चौहान ने कहा कि देश में कानूनी प्रणाली और जमानत की शर्तें इतनी जटिल हैं कि गरीब आदमी जेल में ही पड़ा रहता है। एक वकील का इंतजाम करने के चक्कर में पूरी सजा तक भुगत लेता है जबकि रईस आदमी को उसकी गिरफ्तारी से बहुत पहले अग्रिम जमानत मिल जाती है। जस्टिस चौहान ने कहा- 'गरीब और अमीर को न्याय दिलाने में बड़े वकील भेदभाव करते हैं। बड़े वकील किसी भी तरह के बड़े से बड़े अपराध का बचाव कर सकते हैं।

उन्‍होंने कहा, ‘मैं सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में रिटायर हुआ हूं। अगर मेरा भी कोई केस है तो मैं भी ब़़डे वकीलों का खर्च नहीं उठा सकता हूं। इन दिनों वे इतने महंगे हो गए हैं। वे टैक्सियों की तरह प्रति घंटे, प्रतिदिन के हिसाब से फीस लेते हैं।'

अंग्रेजी में ही क्यों हो सुनवाई

जस्टिस चौहान ने स्थानीय अदालतों में स्थानीय भाषा में सुनवाई की वकालत की। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी में सुनवाई से मामले को गरीब नहीं समझ पाता है। हम विदेशी भाषा में इसलिए बोलते हैं ताकि हमारा मुवक्किल नहीं समझ सके कि हम जो बहस कर रहे हैं, वह उसके लिए उपयोगी है या नहीं। आजादी के 69 साल बाद भी अदालतों में अंग्रेजी को ढोने का यही कारण है।

सेमिनार का आयोजन तिहाड़ के कैदियों ने ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट, दिल्ली यूनिवसिर्टीज स्कूल ऑफ सोशल वर्क, कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव के सहयोग से किया था। इसे दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी संबोधित किया।

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Posted By: Monika Minal