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रेप के आरोपी जज ही कर रहे पॉक्सो मामले की सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद HC को भेजा नोटिस

Published: Wed, 04 Nov 2026 08:12 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी उत्तर प्रदेश के एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट से ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट की तस्वीर (फाइल)

सुप्रीम कोर्ट की तस्वीर (फाइल)

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म आरोपी जज पर इलाहाबाद HC से मांगा जवाब।

  2. यूपी के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश पर यौन शोषण का आरोप।

  3. आरोपी जज पॉक्सो मामलों की सुनवाई कर रहे थे।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में दाखिल याचिका पर विचार करने की सहमति दे दी है जिसमें ये आरोप एक न्यायिक अधिकारी पर लगे हैं। मामला उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश से जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट प्रशासन से इस मामले में नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह नोटिस उत्तर प्रदेश के एक न्यायिक अधिकारी के खिलाफ दायर याचिका पर दिया गया है, जो बलात्कार के मामले में आरोपी होने के बावजूद पॉक्सो मामलों का प्रभार संभाल रहे हैं।

दिल्ली पुलिस कर रही है जांच

मुख्य न्यायधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने आदेश पारित किया है। शुरुआत में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इससे जुड़े मामले में एक याचिका को खारिज कर दिया था। उत्तर प्रदेश के एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश पर एक महिला के यौन शोषण का आरोप है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील राकेश कुमार सिंह ने पीठ को बताया कि कम से कम उस न्यायाधीश से न्यायिक कार्य तो वापस ले लिया जाना चाहिए, लेकिन इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। पीठ ने एक संक्षिप्त आदेश में कहा कि नोटिस जारी कर जवाब 11 दिसंबर मंगाएं।

मयूर विहार पुलिस स्टेशन में है केस दर्ज

याचिकाकर्ता ने आठ दिसंबर 2022 को मयूर विहार पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें उसने एक न्यायिक अधिकारी पर आरोप लगाया है, जिससे वह एक मैट्रिमोनियल साइट पर मिली थी। महिला का आरोप है कि उस अधिकारी ने शारीरिक संबंध बनाने के लिए उससे बार-बार शादी करने का झूठा वादा किया।

जनवरी 2023 में, दिल्ली पुलिस ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से उस न्यायिक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुमति मांगी। महिला ने बताया कि दो महीने बाद, दिल्ली हाई कोर्ट ने जज को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दे दी, लेकिन पुलिस को जांच जारी रखने की अनुमति दी।

जांच में सहयोग का निर्देश

बाद में पुलिस ने मजिस्ट्रेट के सामने उसका बयान दर्ज किया। जून 2023 में, पुलिस ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को एक रिमाइंडर भेजा, जिसमें न्यायिक अधिकारी के खिलाफ जांच आगे बढ़ाने की अनुमति पर जल्द फैसला लेने का अनुरोध किया गया था। इस पर हाईकोर्ट ने बताया कि उस अधिकारी के खिलाफ पहले से ही एक विजिलेंस जांच चल रही है।

अक्टूबर 2024 में, इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने जांच की अनुमति दे दी और हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारी को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया। कुछ समय बाद पूरा प्रकरण सुप्रीम कोर्ट के सामने पहुंच गया।

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